जबलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

रामकथा सबकी है जो गाए उसी की है। अधिकारी भी वही जो कह सके। भगवान राम अयोध्या के नहीं वे तो सर्वव्यापक हैं। राम को किसी फ्रेम में रखा जा सकता है लेकिन उनके चरित्र को किसी फ्रेम में नहीं रखा जा सकता। वे तो सर्वव्यापक हैं इसलिए मेरी दृष्टि में रामचरित मानस वैश्विक गं्रथ हैं। यह कहना है प्रख्यात संत मोरारी बापू का। वे बुधवार को वर्ल्ड रामायण कांफ्रेंस के समापन सत्र को एमएलबी मैदान में संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि राम वैश्विक आनंद हैं, उन्हें सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। राम को सीमित करने की जितनी कोशिशें की जाती हैं, राम उतने ही व्यापक होते जाते हैं। यह हर्ष की बात है कि सारी दुनिया के प्रतिभाशाली विद्वान एक मंच पर राम और रामायण की व्याख्या कर रहे हैं। यदि राम वैश्विक न होते तो विश्व रामायण सम्मेलन की भूमिका ही असंभव थी। प्रारंभ में साकेतवासी स्वामी राजेश्वरानंद को उन्होंने प्रणाम किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

शिव, नर्मदा, रामायण का दुर्लभ संयोगः

बापू ने कहा कि शिव को रामचरित मानस उतना ही प्रिय है, जितनी मां नर्मदा। संस्कारधानी इस अद्भुत और दुर्लभ संयोग का साक्षी है कि यहां शिव की पसंद की दोनों बातें विद्यमान हैं। नर्मदा तट पर आयोजन बेहद सुखदायी है।

मंच कराते हैं भेदः

एक संस्मरण सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब मैं प्रायमरी टीचर था तो एक शिक्षक का सम्मान समारोह था। उसमें सांसद भी पहुंचे जो मुस्लिम समाज से थे। कार्यक्रम में सभी बच्चों को हनुमान चालीसा पाठ करना था। लेकिन मैंने देखा कि सामने 10-12 मुस्लिम बच्चियां हनुमान चालीसा का पाठ कर रहीं थी। मैंने पाठ के बाद उन बच्चियों से पूछा कि तुम इस्लाम धर्म से हो तुमसे जबरदस्ती तो पाठ नहीं करवाया। तब उन बच्चियों ने अच्छा उत्तर दिया। उनका कहना था कि भेद तो मंच पर बैठे लोग कराते हैं, हम नहीं करते।

नर्मदा गोकुंभ के लिए संत की वेशभूषा न देखें:

बापू ने कहा कि मुझे पता चला कि यहां सरकार 6-6 साल में स्वयं नर्मदा गोकुंभ करा रही है। इसमें सरकार पूरा योगदान दे रही है। यह अच्छी बात है लेकिन ध्यान रखना यह सब करने से पहले उन साधुओं का मत जरूर लेना जो निष्पक्ष हों। उनके अनुसार ही यह आयोजन करना। यह संतों द्वारा किया जा रहा है अच्छी बात है लेकिन इसमें वेशधारी साधू का मत नहीं लेना। क्योंकि वेश से वृत्ति प्रकट होती है। इसलिए किसी साधु के वेश में मत जाना। क्योंकि वेश की बहुत बड़ी महिमा होती है।

रामायण के विद्वानों का किया सम्मानः

मोरारी बापू ने विश्व सम्मेलन में पधारे अमेरिका के स्टीफन नैप, थाईलेंड के प्रो.चिरापत प्रपन्नविद्या, मॉरीशस की वीनू बाला एवं मप्र के फारुख रामायणी का सम्मान किया। कार्यक्रम में मंच पर स्वामी श्यामदेवाचार्य, स्वामी अखिलेश्वरानंद, कृष्णकांत चतुर्वेदी के अलावा जिले के सभी विधायक उपस्थित रहे।

वित्त मंत्री ने कहा हम धन्य हो गएः

प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री तरुण भनोत ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि इस आयोजन में मोरारी बापू की उपस्थिति से हम सब धन्य हो गए। जबलपुर पर संतों का आशीर्वाद सदैव बरसता रहा है। उन्होंने कहा कि भले ही बापू अल्प समय के लिए आ सके, लेकिन संस्कारधानी के लिए यह भी बहुत बड़ा अवसर है।

महापौर ने किया नागरिक अभिनंदनः

महापौर स्वाति गोडबोले ने बापू का नागरिक अभिनंदन किया और अभिनंदन पत्र का वाचन किया। कार्यक्रम के पश्चात बापू की उपस्थिति में महापौर ने सभी को स्वच्छता की शपथ दिलाई।

शब्द मानस ग्रंथ का विमोचनः

कार्यक्रम में जनसंपर्क संचालक ओपी श्रीवास्तव और भारती श्रीवास्तव के ग्रंथ शब्द मानस का विमोचन संत मोरारी बापू ने किया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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