जबलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

निजी निवेशक या नॉन बैकिंग क्षेत्र की फर्जी कंपनियों से बचने का कोई तरीका लोगों के पास नहीं है। क्योंकि प्रशासन या संबंधित विभाग के पास भी ऐसी कोई सूची उपलब्ध नहीं है, जिससे कंपनियों की वास्तविकता या उनके सही होने की पुष्टि की जा सके। जब कंपनियां लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुकी होती हैं, तब शिकायत से उसके फर्जीवाड़े की जानकारी मिलती है। इसलिए लोगों के पास सिर्फ एक ही विकल्प है कि वह खुद सतर्क रहे और आरबीआई की सूची देखने के बाद ही किसी कंपनी में निवेश करें।

यह दिखावे का विभागः

कलेक्टर कार्यालय में संस्थागत वित्त अधिकारी का दफ्तर है। लेकिन इस दफ्तर के पास ही कंपनियों का रिकॉर्ड नहीं है। सिर्फ आरबीआई से रजिस्टर्ड निवेशक कंपनियों की जानकारी है। कभी सर्वे नहीं किया जाता और न ही इस कार्यालय की जानकारी लोगों को है।

यहां कर सकते पतासाजीः

यदि कोई निवेशक कंपनी आपसे किसी भी तरह का निवेश करने का लालच देती है, रकम को दोगुना करना, किसी भूमि, भवन, शेयर आदि खरीदने जैसे अवसर की बात करे। तब आप उसकी पड़ताल के लिए आरबीआई यानी भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर जाकर निवेशक कंपनियों का ब्योरा प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा जिले के लीड बैंक यानी सेंट्रल बैंक में जाकर भी निवेशक कंपनियों, बैंकों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

अब तहसीलदार करेंगे जांचः

जो कंपनियां सैकड़ों लोगों के साथ फर्जीवाड़ा कर चुकी हैं, उनकी शिकायत कलेक्टर कार्यालय को मिली है। ऐसी चार शिकायतों को उस क्षेत्र के तहसीलदारों के पास जांच के लिए भेजा गया है। चूंकि कंपनियों का अब कोई भी रिकॉर्ड या दफ्तर मौजूद नहीं है, इसलिए जांच पूरी होने की गारंटी भी नहीं दी जा सकती है। ऐसे मामलों में पुलिस विभाग द्वारा भी जांच की जाती है।

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कंपनियों या निवेश करने वालों की सूची संस्थागत वित्त कार्यालय के पास नहीं रहता है। विभाग भी आरबीआई की सूची को ही अधिकृत मानता है। अभी कुछ शिकायत प्राप्त हुई हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है।

-हेमंत सिंह, संस्थागत वित्त अधिकारी

Posted By: Nai Dunia News Network

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