जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

नगर निगमों में महापौर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुको में याचिका दायर कर मप्र हाई कोर्ट के 10 जनवरी 2020 के फैसले को अनुचित बताया गया है। दावा किया गया है कि मप्र हाईकोर्ट ने 1997 में महापौर के अप्रत्यक्ष निर्वाचन को सही माना था, फिर इसी फैसले को 2020 में गलत कैसे मान लिया गया ?

क्या है मामला-

याचिका दायर करने वाले जबलपुर के डॉ.पीजी नाजपांडे ने बताया कि 1997 में सरकार ने जनता द्वारा महापौर के चुनाव का निर्णय लिया था। जिसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। हाई कोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज करते हुए 10 दिसंबर 1997 को प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली को सही माना था। लेकिन उनकी जनहित याचिका में इस बार अप्रत्यक्ष चुनाव को दी गई चुनौती को मान्य नहीं किया गया। 27 नवंबर 2019 को कोर्ट ने अप्रत्यक्ष प्रणाली से होने वाले नुकसान की ओर ध्यान न देकर जनहित याचिका निरस्त कर दी। इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका पर भी 10 जनवरी 2020 को कोर्ट ने अपने पूर्व निर्णय को सही ठहराया। आम नागरिक मित्र फाउंडेशन के डॉ.नाजपांडे, रजत भार्गव, डीआर लखेरा ने बताया कि हाई कोर्ट के इसी फैसले को चुनौती दी गई है।

Posted By: Nai Dunia News Network