जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

नवरात्रि पर्व पर अष्टमी-नवमी तिथि को हवन करने का विशेष महत्व है। इस बार कोरोना वायरस की महामारी के कारण सार्वजनिक आयोजन नहीं हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में श्रद्धालु घर पर संकल्पित होकर पूजन कर रहे हैं। अगर आप घर पर ही सरल रीति से हवन करना चाहते हैं तो आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे ने बताया कि इस सरल हवन विधि द्वारा आप अपने पूरे परिवार के साथ यज्ञ-हवन करके नवरात्रि पूजन को पूर्णता प्रदान कर सकते हैं। माता का हवन ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डयै विच्चै नमः इस बीज मंत्र से 108 बार करें।

राशि के अनुसार ऐसे करें हवनः

मेषः भगवती तारा, नील-सरस्वती या माता शैलपुत्री की साधना करें।

बीज मंत्र- श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं प्रीं ह्रां ह्रीं सौं से हवन करें

वृषभः भगवती षोडशी-श्री विद्या की साधना करें या माता ब्रह्मचारिणी की।

बीज मंत्र : श्रौं श्रीं ह्सूं हौं ह्रीं अं क्लीं चां मुं डां यैं विं च्चें से हवन करें

मिथुनः इन्हें माता भुवनेश्वरी की या माता चन्द्रघंटा की उपासना करनी चाहिए।

बीज मंत्र : श्रौं प्रीं ओं ह्रीं ल्रीं त्रों क्रीं ह्लौं ह्रीं श्रीं से हवन करें

कर्कः माता कमला अथवा माता सिद्धिदात्री की उपासना करनी चाहिए।

बीज मंत्र : श्रौं ओं त्रूं ह्रौं क्रौं श्रौं त्रीं क्लीं प्रीं ह्रीं ह्रौं श्रौं से हवन करें

सिंहः माता पीताम्बरा या माता कालरात्रि की उपासना करनी चाहिए।

बीज मंत्र : श्रौं रीं रूं क्लीं दुं ह्रीं गूं लां ह्रां गं ऐं श्रौं से हवन करें

कन्याः इन्हें माता भुवनेश्वरी या माता चन्द्रघंटा की उपासना करनी चाहिए।

बीज मंत्रः श्रौं सां श्रीं जुं हं सः से हवन करें

तुलाः इन्हें श्री विद्या में माता षोडशी या माता ब्रह्मचारिणी की उपासना करनी चाहिए।

बीज मंत्र : श्रौं ओं त्रूं ह्रौं क्रौं श्रौं त्रीं क्लीं प्रीं ह्रीं ह्रौं श्रौं से हवन करें

वृश्चिकः इन्हें भगवती तारा या माता शैलपुत्री की उपासना करनी चाहिए।

बीज मंत्र : सौः ह्लौं क्रूं सौं से हवन करें

धनुः इन्हें माता कमला या माता सिद्धिदात्री की उपासना करनी चाहिए।

बीज मंत्रः श्रौं ह्रीं ब्लूं ह्रीं म्लूं ह्रं ह्रीं ग्लीं श्रौं धूं हुं द्रौं श्रीं से हवन करें

मकरः इन्हें माता काली या माता सिद्धिदात्री की उपासना करनी चाहिए।

बीज मंत्रः ह्रीं ओं श्रीं ईं क्लीं क्रूं श्रूं प्रां क्रूं से हवन करें

कुंभः इन्हें माता काली या माता सिद्धिदात्री की उपासना करनी चाहिए।

बीज मंत्रः श्रौं व्रीं ओं औं ह्रां श्रीं श्रां ओं प्लीं सौं ह्रीं से हवन करें

मीनः इन्हें माता कमला या माता सिद्धिदात्री की उपासना करनी चाहिए।

बीज मंत्रः ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामण्डायै विच्चे। ओम ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा से हवन करें।

Posted By: Nai Dunia News Network

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