जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

ट्रेन से लेकर रेलवे स्टेशन तक में दिन-रात तैनात रहकर यात्रियों को भोजन, पानी और खाने की सामग्री बेचने वाले वेंडरों का खुद का पेट भरना भी मुश्किल हो गया है। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की वजह से 22 मार्च से ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से बंद है। रेलवे स्टेशन से लेकर सर्कुलेशन एरिया तक सन्नाटा पसरा है। खाने-पीने के स्टॉलों पर ताले लटके हुए हैं। इनमें काम करने वाले वेंडर इन दिनों स्टॉल का ठेका लेने वाले लाइसेंस धारियों से लेकर रेलवे अधिकारियों तक के चक्कर लगा रहे हैं, ताकि किसी तरह उन्हें वेतन मिल जाए। इधर रेलवे ने भी अब तक इसकी मदद के लिए कोई पहल नहीं की है।

मंडल के दो हजार वेंडर, किसी को नहीं मिली मदद

जबलपुर समेत कटनी, दमोह, सागर, मैहर, सतना, रीवा, नरसिंहपुर, गाडरवारा, करेली और पिपरिया जैसे बड़े रेलवे स्टेशन पर तकरीबन 2 हजार वैध वेंडर काम करते हैं। इनकी आय का मुख्य स्त्रोत यात्रियों को बेचने वाले भोजन से होने वाली आय है, जो मुख्य तौर पर स्टॉल लेने वाले ठेकेदार से मिलती है, लेकिन 18 दिन से स्टेशन, ट्रेन पूरी तरह से बंद है। रेलवे ने जनवरी में ही स्टॉल का ठेके देकर ठेकेदारों से लाखों रुपए लाइसेंस शुल्क ले लिया था। इधर स्टॉल बंद होने से आय पूरी तरह से बंद हो गई है। ठेकेदारों ने भी रेलवे से मदद करने के लिए आगे आने कहा है, लेकिन अभी तक मदद के लिए रेलवे ने पहल नहीं की।

60 फीसदी काम ठेके पर, पर मजदूर को वेतन नहीं

रेलवे में इन दिनों 60 फीसदी काम ठेके पर हो गया है। कमर्शियल विभाग से लेकर इंजीनियरिंग, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और यहां तक की ट्रैक की मरम्मत और सुरक्षा का काम भी ठेके पर ही हो रहा है, लेकिन इन दिनों यह काम बंद हैं। रेलवे बोर्ड से लेकर पश्चिम मध्य रेलवे जोन, जबलपुर मंडल, हर कोई चुप्पी साधे हुआ है। रेलवे कर्मचारियों को समय पर वेतन मिल गया है, लेकिन इन मजदूरों के सामने अपना और अपनों का पेट भरने की मुश्किल खड़ी हो गई है।

इनका हाल बुरा, घर में राशन तक नहीं

- ट्रेनों के कोच-बाथरूम की सफाई करने वाले कर्मचारी।

- एसी कोच में यात्रियों को बेडरोल देने वाले अटेंडर।

- खाने के स्टॉल लगाने वाले, ट्रेन में खाना बेचने वाले।

- बेडरोल साफ करने वाले कर्मचारी, मजदूर।

- रेलवे में सिविल वर्क में लगे हुए मजदूर।

- पार्सल विभाग में ठेके पर काम करने वाले मजदूर।

वर्जन

रेलवे जब भी ठेका देता है तो उसकी शर्तों में यह प्रावधान होता है कि अगर किसी तरह की प्राकृतिक आपदा आए, तब भी ठेकेदार को अपने मजदूरों को वेतन भुगतान करना होगा। हमने फरवरी तक के सभी बिलों का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

-संजय विश्वास, डीआरएम, जबलपुर रेल मंडल

Posted By: Nai Dunia News Network

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