जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

कोरोना संक्रमणकाल से पहले जिले के हजारों मजदूर दूसरे राज्यों में काम करने गए थे। इसी तरह प्रदेश के भीतर दूसरे जिलों में भी मजदूरों के परिवारों का पलायन हुआ। जो लॉकडाउन के दौरान एक या दो माह के भीतर वापस पैदल या जैसे-तैसे लौट आए। खास बात यह है कि सिर्फ दूसरे प्रांत से आए मजदूरों को सर्वे में चि-ति किया गया है, प्रदेश के भीतर यदि वह काम करने गए तो उनका सर्वे में कोई उल्लेख नहीं होगा। सर्वे में होने वाली इस विसंगति का मजदूर व श्रमिक संगठनों के बीच गलत संदेश पहुंचा है। ऐसे कई संगठनों के पदाधिकारियों ने इस तरह के रवैये को आड़े हाथों लेने का मन बना लिया है।

आए तो हजारों, लेकिन प्रांत वाले ही दर्जः

- ग्रामीण क्षेत्रों में 2 जून तक के सर्वे में 6 हजार से ज्यादा श्रमिक दूसरे प्रांत से वापस आने की जानकारी दर्ज की गई। लेकिन जो आसपास के जिलों या प्रदेश से काम करके वापस आए हैं, उनको सर्वे में कोई स्थान नहीं मिला। इसी तरह नगर निगम सीमा क्षेत्र में लगभग 1200 मजदूर दूसरे राज्य वाले बताए गए। जिनमें से 800 का पंजीयन हो चुका है।

सिर्फ इन्हीं का हुआ सर्वे

- शासन के नियमों में कहा गया कि श्रमिकों का सर्वे, सत्यापन और पंजीयन उन्हीं प्रवासी श्रमिकों का किया जाएगा जो मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना अथवा भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल में पंजीयन के लिए पात्रता रखते हैं। सर्वे के दौरान प्रवासी श्रमिक जो मप्र के मूल निवासी नहीं हैं। इसके अलावा जो मप्र के मूल निवासी श्रमिक तो हैं लेकिन 1 मार्च 2020 से पूर्व नियोजित राज्य से पहले ही वापस आ चुके हैं। वहीं जो श्रमिक राज्य के बाहर प्रवास पर नहीं गए हैं। इन सभी का सर्वे, सत्यापन व पंजीयन नहीं किया जाएगा। जिन प्रवासी श्रमिकों का समग्र आईडी नहीं है और जो मप्र के मूल निवासी हैं। ऐसे प्रवासी श्रमिकों का समग्र आईडी नियत प्रक्रिया अनुसार समग्र पोर्टल पर जनरेट किया जाएगा।

वर्जन

यदि कोई मजदूर दूसरे प्रांत जाए तो उसे मजदूर माना जाएगा। यदि वह प्रदेश के किसी जिले में काम करे तो क्या उसे मजदूर नहीं माना जाएगा। यह बहुत बड़ी विसंगति है। इसको लेकर केंद्र व राज्य शासन तक शिकायत की जाएगी।

राजकुमार सिन्हा, बरगी बांध विस्थापित एवं प्रबंधन समिति संयोजक

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मजदूर किसी राज्य या जिले का नहीं बल्कि देश का नागरिक है। उसकी नागरिकता पर प्रश्न चिंह न खड़ा करें। यह सामंतवादी सोच को बदलना होगा। यह नहीं होना चाहिए कि वह किसी दूसरे राज्य जाए तो मजदूर मानें उसे और बाकियों को भूल जाएं। इस बात का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

-एसएन पाठक, राष्ट्रीय अध्यक्ष एआईडीईएफ

Posted By: Nai Dunia News Network

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