जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर बरती जा रही लापरवाही पर जवाब-तलब कर लिया है। इस सिलसिले में राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार मित्तल व जस्टिस बीके श्रीवास्तव की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी अधिवक्ता आदित्य संघी ने अपना पक्ष स्वयं रखा।

अकेले जबलपुर में 25 अरब लीटर वर्षा जल हो रहा बेकारः

उन्होंने दलील दी कि समूचे राज्य में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के अभाव में क्या नुकसान हो रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले जबलपुर में प्रतिवर्ष लगभग 25 अरब लीटर वर्षा जल बेकार बह जाता है। यदि इसका वैज्ञानिक तरीक से संरक्षण कर लिया जाए तो जल स्तर नीचे जाने की समस्या का निवारण संभव है। साथ ही मौसम-चक्र की गड़बड़ी थमेगी और चारों तरफ हरियाली भी बढ़ेगी।

प्रत्येक नागरिक के लिए अनिवार्य हो वाटर हार्वेस्टिंगः

अधिवक्ता श्री संघी ने जोर देकर कहा कि कायदे से वाटर हार्वेस्टिंग राज्य के प्रत्येक नागरिक के लिए अनिवार्य कर दी जानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि समय रहते जल संरक्षण व संवर्धन की दिशा में ठोस कदम न उठाए जाने से भविष्य में व्यापक जल संकट गहराने से इन्कार नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में जल को लेकर त्राहि-त्राहि मच सकती है।

आठ साल बाद भी भूमि विकास नियम का पालन नदारदः

जनहित याचिकाकर्ता श्री संघी ने हाई कोर्ट का ध्यान इस तरफ आकृष्ट कराया कि भूमि विकास नियम-2012 लागू होने के आठ साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। आलम यह है कि इसके रूल 81 के तहत किसी भी निर्माण का नक्शा मंजूर होने समय वाटर हार्वेस्टिंग की अनिवार्यता को महज कागजी स्तर पर सीमित कर दिया गया है। हकीकत की जमीन पर शर्त का पालन नदारद रहता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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