जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

न्यूनतम विद्यार्थियों के प्रवेश की बंदिश ने स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों में प्रवेश के दरवाजे बंद कर दिए हैं, क्योंकि कई पाठ्यक्रम ऐसे हैं जहां प्रवेश लेने वालों की संख्या बेहद कम थी। बीते अकादमिक सत्र में विद्यार्थियों के प्रवेश के आधार पर ही नए सत्र में प्रवेश दिया जा रहा है। जहां स्नातक के स्ववित्तीय पाठ्यक्रम में 25 और स्नातकोत्तर में 10 से कम विद्यार्थियों का प्रवेश है। ऐसे पाठ्यक्रम को सत्र 2020-21 में संचालित नहीं किया जाएगा। इधर युनिवर्सिटी ने यदि इस नियम पर अमल किया तो आधे से ज्यादा स्ववित्तीय पाठ्यक्रम में प्रवेश बंद करना होगा।

क्या है नियमः

उच्च शिक्षा विभाग ने प्रवेश मार्गदर्शिका में स्ववित्तीय पाठ्यक्रम के लिए शर्त तय की है। जिसमें बीते सत्र 2019-20 में स्नातक पाठ्यक्रम में न्यूनतम विद्यार्थी 25 तथा स्नातकोत्तर में न्यूनतम विद्यार्थी 10 होना अनिवार्य है। इससे कम होने पर ऐसे पाठ्यक्रम में प्रवेश की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल स्ववित्तीय कोर्स में संस्थानों को कोर्स से होने वाली आय से शिक्षक और अन्य खर्च निकालना होता है। कई संस्थानों में चलन से बाहर हो चुके पाठ्यक्रम खुद के फायदे के लिए शुरू कर दिए गए। जहां विद्यार्थी प्रवेश ही नहीं लेते हैं लेकिन उसका संचालन महंगा पड़ता है। जिससे संस्थानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।

युनिवर्सिटी में कई कोर्स जहां कम संख्याः

रानी दुर्गावती युनिवर्सिटी में स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों में बीसीए, बीएससी माइक्रोबॉयोलॉजी, बीएससी बॉयोटेक्नोलॉजी है जहां प्रवेशित विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम है। वहीं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में एमएससी कम्प्यूटर साइंस,एमएससी साइबर सिक्युरिटी,एमएससी इलेक्ट्रानिक्स,एमएससी बॉयोकैमेस्ट्री,एमबीए इंटरनेशनल बिजनेस इकोनॉमिक्स, डिप्लोमा इन रिनेवल एनर्जी, पीजी डिप्लोमा इन जेंडर स्टडीज आदि विषय है। यदि निर्धारित प्रवेशित विद्यार्थियों की संख्या का नियम लागू हुआ तो इन कोर्स के संचालन बंद करना होगा।

कॉलेजों को भी मुश्किल :

होमसाइंस कॉलेज की प्रवेश प्रभारी डॉ.गीता शुक्ला ने बताया कि उनके यहां संचालित स्ववित्तीय पाठ्यक्रम में छात्राओं की संख्या बेहतर होती है। इसलिए यहां सभी कोर्स में प्रवेश दिया जाएगा। मानकुंवर बाई कॉलेज की डॉ.ऊषा कैली के अनुसार स्ववित्तीय पाठ्यक्रम की बजाए संस्थान में विषय संचालित होते हैं इसमें फंग्शनल हिंदी में छात्राओं की रुचि कम होने से प्रवेश नहीं दिया जाएगा। वहीं महाकोशल कॉलेज की प्राचार्य डॉ.आभा पांडे के मुताबिक पिछले साल ही एमए सायकोलॉजी और बीए एडवरटाइजमेंट कोर्स में विद्यार्थियों की कम संख्या के कारण इन्हें बंद कर दिया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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