जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

कोरोना आपदा के बीच इंद्रदेव की बेरूखी से एक नया संकट पैदा हो गया है। वह यह कि बारिश न होने से पिछले साल के मुकाबले इस साल जिले में खरीफ सीजन में जहां बोनी का रकबा 18 हजार हेक्टयर तक घट गया है। वहीं पानी न मिलने से खेतों में जो फसल बोई गई है वह भी मुरझाने लगी है। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल खरीफ फसल दो लाख 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई थी। इस बार बोनी का आंकड़ा एक लाख 96 हजार हेक्टेयर में ही सिमट कर रह गया है। जबकि कृषि विभाग ने इस बार बारिश की अच्छी उम्मींद को लेकर दो लाख 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा था।

----

धान, सोयाबीन में पिछड़े

बारिश न होने से धान की बोनी भी पिछले साल की तुलना में पिछड़ गई। खरीफ सीजन 2019 में जिले में धान की बोनी एक लाख 32 हजार हेक्टेयर में हुई थी। इस साल अभी तक एक लाख 25 हजार हेक्टेयर में ही हो पाई है। यानी धान की बोनी में सात हेक्टेयर की कमी आंकी जा रही है। इसी तरह सोयाबीन का रकबा चार हजार की जगह मात्र दो हजार हेक्टेयर में सिमट कर रह गया।

------

इन फसलों का बढ़ा रकबा

- बारिश की बेरूखी को देखते हुए किसानों ने दूसरी फसलों का विकल्प भी समय रहते चुन लिया। जिससे मक्का, उड़द, मूंग, रामतिल की बोनी का रकबा बढ़ गया।

- मक्का की बोनी इस बार दोगुना हुई है। पिछले साल मक्का की बोनी जहां आठ हजार हेक्टेयर में हुई थी वहीं इस बार 16 हजार 400 हेक्टेयर में हुई है। इसी तरह उड़द 11 हजार 500, मूंग चार हजार हेक्टयर में हुई है।

-----बाक्स

पिछले पांच सालों में बोनी का गणित

वर्ष - बोनी (हेक्टेयर में)

2016 - 1 लाख 72 हजार

2017 - 1 लाख 81 हजार

2018 - 2 लाख 17 हजार

2019 - 2 लाख 14 हजार

2020- 1 लाख 96 हजार

-------

किसानों की चिंता बढ़ी

बारिश न होने से खेतों में मुरझा रही फसलों को किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभरने लगी हैं। जिनके पास सिंचाई का साधन हैं, वे तो निश्चिंत हैं। लेकिन जो कुदरती बारिश पर निर्भर है उनकी परेशानी बढ़ गई है। किसान यह सोचकर चिंतित हैं कि कोरोना आपदा उनकी आर्थिक स्थिति ही खराब हो चुकी है। यदि फसलें सूख गईं तो परेशानी बढ़ जाएगी। हालांकि कृषि विभाग का कहना है कि फसलों की सिचांई के लिए बरगी दांई और बांई तट से नहरों के जरिए पानी दिया जा रहा है। यदि बारिश नहीं हुई तो जरूर परेशानी खड़ी हो सकती है। जिले में करीब दो लाख 13 हजार किसान हैं।

---

पिछले साल के मुकाबले खरीफ सीजन में अभी तक 1 लाख 96 हजार हेक्टेयर में बोनी हुई है। फिलहाल फसलें खराब होने की स्थिति में नहीं है। बरगी नहर से पानी दिया जा रहा है। यदि बारिश नहीं तो परेशानी जरूर बढ़ सकती है।

एसके निगम,उपसंचालक कृषि, कलेक्टर कार्यालय

Posted By:

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

Ram Mandir Bhumi Pujan
Ram Mandir Bhumi Pujan