जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की वजह से मरीजों को आइसोलेट करने की समस्या खड़ी हो रही है। इस काम में रेलवे की मदद लेते हुए उन्हें आइसोलेशन कोच तैयार करने कहा गया। जबलपुर रेल मंडल ने चार माह पूर्व ही इन कोचों को बनाकर तैयार कर लिया। इन्हें कहने के लिए आइसोलेशन कोच बनाया गया है, लेकिन एक भी कोच में न तो आक्सीजन की व्यवस्था है और न ही वेंटीलेटर।

दरअसल जबलपुर मंडल ने 46 आइसोलेशन कोच तैयार किया थे, जिसमें से 24 कोच दिल्ली भेज दिए गए। अभी 22 कोच और खड़े हैं, जिनके लिए अभी तक कोई डिमांड नहीं आई है।

4 माह से बंद कोच, न सफाई न मेंटेनेंस

22 कोच की आइसोलेशन ट्रेन में 19 जनरल कोच हैं, जिन्हें आइसोलेशन कोच में बदला गया है। इसके साथ 2 एसएलआर यानि पार्सल कोच हैं। इसके अलावा इसमें 1 एसी कोच भी लगाया गया है, जो मेडिकल स्टॉफ के पास है। इन कोच को जबलपुर रेल अस्पताल के हेंडओवर किया गया है। पिछले 4 माह से यह कोच बंद हैं। सिर्फ खिड़की में पर्दे और सीटों में फेरबदल किया गया है। बाकी कोच किसी में भी आक्सीजन नहीं है। वहीं वेंटीलेटर लगना कोच में संभव ही नहीं।

कोच का कम उपयोग

जबलपुर से जिन आइसोलेशन कोचों को दिल्ली भेजा गया था, उनका भी एक या दो बार ही उपयोग किया गया है। दरअसल इन कोच में आइसोलेशन की पर्याप्त सुविधा नहीं है। वहीं दूसरी ओर कोच के एक केबिन में दो मरीजों को आइसोलेट किया जा सकता है, लेकिन जब इन्हें आक्सीजन की जरूरत होगी तो एक केबिन में एक ही आक्सीजन लगाना संभव हो पाएगा।

वर्जन-

वर्तमान में हमारे पास 22 आइसोलेशन कोच का रैक है। इनमें पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं हैं। जहां से भी इनकी डिमांड आएगी, वहां इन्हें भेज दिया जाएगा।

विश्वरंजन, सीनियर डीसीएम, जबलपुर रेल मंडल

Posted By: Nai Dunia News Network

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