जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

भारतीय भोजन में शामिल सब्जियों का राजा आलू इन दिनों आम आदमी की जेब काटने पर आमादा है। वर्तमान में इसकी कीमत 40 रुपये प्रति किलो पहुंच चुकी है। माढ़ोताल स्थित कृषि उपज मंडी के थोक बाजार का 36 रुपये किलो का आलू फुटकर बाजार निवाड़गंज व मिलौनीगंज आदि में चार रुपये अधिक यानी 40 रुपये किलो बिक रहा है।

छह माह पहले के मुकाबले आलू की कीमत दोगुनी हो चुकी है। जबलपुर में कोविड-19 का पहला पॉजिटिव केस मिलने के दौरान 20 रुपये किलो आलू आसानी से मिल रहा था। जैसे-जैसे अनलाक की स्थिति बनी आलू की कीमत प्रभावित होने लगी।

ऐसे बढ़ी कीमत :

-पहले 20 रुपये किलो।

-फिर 25 रुपये किलो।

-इसके बाद 30 रुपये किलो।

-अनलाक के समय 35 रुपये किलो।

-फिलहाल 40 रुपये किलो।

छोटे बाजारों और गलियों में और महंगाः

शहर की बड़ी सब्जी मंडियों में आलू 40 रुपये किलो मिल जाता है, लेकिन जैसे ही यही आलू जबलपुर की छोटी सब्जी मंडियों तक पहुंचता है, ग्राहकों को एक किलो के लिए 50, 55 या फिर 60 रुपये तक चुकाने विवश होना पड़ता है।

एक बोरे में एक किलो दागी, 10 किलो छर्रीः

निवाड़गंज, जबलपुर के सब्जी विक्रेता आकाश पटेल ने बताया कि बड़ी मंडी से एक बोरे आलू लेकर आते हैं, उसमें से एक किलो दागी आलू अलग करना पड़ते हैं, जो किसी काम के न होने के कारण मवेशियों को खिलाने पड़ते हैं। बोरे में करीब दस किलो आलू छर्री (छोटा) निकल जाता है, जिसे अपेक्षाकृत कम कीमत में बेचने मजबूर होना पड़ता है।

पहले एक दिन में आठ बोरे बेचते थे, अब महज तीनः

मिलौनीगंज मंडी के अनवर ने बताया कि कोविड-19 के खतरे के पहले बड़ी बाजार से कम से कम आठ बोरा आलू रोज लाकर बेच देते थे। इन दिनों महज तीन बोरा बमुश्किल बेच पा रहे हैं।

जनता की जेब भले हल्की हो रही लेकिन मुनाफा मामूलीः

गढ़ा बजार के सब्जी विक्रेता तारा पटल ने बताया कि आलू की अधिक कीमत भले ही आम जनता की जेब हल्की कर रही है लेकिन हकीकत यह है कि हम जैसे सब्जी विक्रेता एक बोरा आलू बेचकर बड़ी मंडी में अदा की गई कीमत के मुकाबले बमुश्किल सौ-सवा सौ रुपये अधिक कमा पाते हैं। दागी और छर्री की मात्रा अधिक होना इसकी मुख्य वजह होती है।

मांग के हिसाब से आपूर्ति, कोई कालाबाजारी नहीं:

बड़ी बाजार के विक्रेता लालचंद ने बताया कि आलू हो या प्याज दोनों सहित अन्य तमाम सब्जियों के मामले में मांग के हिसाब से आपूर्ति हो रही है। कालाबाजारी जैसे कोई बात इस व्यापार में फिलहाल दूर-दूर तक देखने को नहीं मिल रही है।

बॉक्स...ठंड बढ़ने के साथ कम हो जाएंगी सब्जियों की कीमतें:

सब्जी उत्पादकों ने चर्चा में बताया कि जैसे-जैसे वातावरण में ठंडक बढ़ेगी, सब्जियों के दाम नीचे गिरने लगेंगे। इस बीच ताजी सब्जियों की आवक भी बढ़ आएगी। जब अधिक उत्पादन होता है, तो बाजार के सिद्घांत के अनुरूप जाहिर तौर पर आम जनता को सब्जियों की कीमत कम देनी होती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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