जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

नगर सरकार का कार्यकाल मंगलवार को पूरा हो गया। इन 5 सालों में शहर में जो विकास कार्य कराए गए उसमें नागरिक सुविधा के लिहाज से नगर निगम के कम, स्मार्ट सिटी के ज्यादा दिख रहे हैं। 5 साल के कार्यों के लेखा-जोखा को लेकर नईदुनिया ने महापौर स्वाति गोडबोले से चर्चा की तो उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं तो नगर निगम नेता प्रतिपक्ष राजेश सोनकर ने विकास के नाम भ्रष्टाचार के तीखे आरोप मढ़े। वहीं नगर सरकार की विदाई के दिन जब नगर निगम अध्यक्ष सुमित्रा बाल्मीक से चर्चा की गई तो उन्होंने भी खुले मन से स्वीकार किया शहर हित में जो कार्य होने चाहिए थे, वह नहीं हुए। इंदौर, भोपाल की तर्ज पर विकास कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पाए। नगर निगम अध्यक्ष को इस बात की भी टीस है कि मप्र नगर पालिका अधिनियम में निगम अध्यक्ष को अधिकार तो दिए गए हैं पर आसंदी से दिए निर्देशों का पालन नहीं हुआ। आरोपों की जांच करने एमआईसी सदस्य, अधिकारियों की कमेटी बनाई गई पर कमेटी ने जांच रिपोर्ट सदन के पटल पर नहीं रखी। निर्णय लेने वाले ही सोते रहे, चौकीदारी नहीं कर पाए।

नगर निगम अध्यक्ष से सवाल-जवाब

सवालः 5 साल के कार्यकाल में शहर में हुए विकास कार्य से क्या आप संतुष्ट हैं?

जवाबः नगर सरकार के 5 साल के कार्यकाल में सभी पार्षदों का ध्यान जनता को सुविधाएं देने पर रहा। विकास की बात करें तो काम से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हूं। किसी व्यक्ति को संतुष्ट होना भी नहीं चाहिए। कुछ ज्यादा करने की इच्छा होनी चाहिए। शहर में विकास कार्य इंदौर, भोपाल की तरह तीव्र गति से नहीं हो पाए।

सवालः शहर में नगर निगम के काम कम, स्मार्ट सिटी ज्यादा काम किए जा रहे हैं?

जवाबः यह सही है कि केन्द्र सरकार की योजनाओं को प्राथमिकता से कराया गया है। प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण कराया जा रहा है। अटल योजना के तहत पानी की नई टंकिया बनाई जा रही हैं। टंकिया चालू होने के बाद रांझी क्षेत्र का जलसंकट दूर होगा।

सवालः महापौर से आपका सामंजस्य नहीं बन पाया। शहर विकास, नागरिकों के हित में साधारण सभा की बैठक सबसे कम हुई?

जवाबः बैठकें बुलाने का अधिकार महापौर का होता है। अध्यक्ष की स्वीकृति से कार्य प्रस्तावित होते हैं। अध्यक्ष का कार्य सदन चलाना होता है। महापौर को सभी से समन्वय बनाकर बैठक बुलानी होती है। समीक्षा बैठक में मूल्यांकन कर रणनीति बनानी होती है। बैठकें बुलाने में अध्यक्ष का कोई रोल नहीं होता।

सवालः सदन की बैठक में आसंदी से दिए निर्देशों का पालन नहीं हुआ। निर्देशों का पालन हो, इसके लिए क्या अधिनियम में बदलाव होना चाहिए?

जवाबः यह तो सही है कि सदन की आसंदी से दिए निर्देशों के पालन में कमी रह गई है। निर्णय लेने वाले ही सोते रहे, जबकि जागकर चौकीदारी करनी थी। अधिकारियों से पूछना था कि सदन की आसंदी से दिए निर्देशों का कितना परिपालन हुआ। फलां जांच रिपोर्ट कहां है? अधिनियम में बदलाव करने से कुछ नहीं होगा, जो नियम बने हैं उनका ही दृढ़ता से पालन सुनिश्चित कराना होगा।

सवालः आसंदी से दिए गए कौन से निर्देश हैं जिनका पालन नहीं हुआ? दोषी किसे मानती हैं?

जवाबः आसंदी से स्वास्थ्य विभाग, डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के तहत ठेके पर रखे गए 1200 कर्मचारियों के भौतिक सत्यापन, रिलायंस कंपनी के पोल लगाने सहित अन्य आरोपों की जांच करने सदन में सहमति से जांच कमेटी बनाई गई, लेकिन रिपोर्ट सदन के पटल पर नहीं रखी गईं।

Posted By: Nai Dunia News Network