जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। भाई की कलाई सूनी न रह जाए इसलिए रक्षाबंधन पर बहनों द्वारा डाक के जरिए राखी, रुमाल भेजे जाते हैं। इस बार भी हजारों की संख्या में इसी तरह की राखियों के लिफाफे डाकघरों तक पहुंचे। लेकिन हजारों की संख्या में रक्षाबंधन के दिन तक डाक वितरित नहीं हो सकी। इस समस्या को दूर करने डाक विभाग को 15 अगस्त के दिन भी डाक वितरित करनी पड़ी।

लगभग 14 हजार राखी की डाक को वितरित करने का प्रयास किया गया। बावजूद इसके आधे से ज्यादा का वितरण समय रहते नहीं हो सका। इससे ज्यादा लापरवाही निजी कूरियर कंपनी वालों की तरफ से देखने मिली। बहुत से ऐसे लोग सामने आए हैं, जिनकी राखी की डाक आज तक कूरियर वाले निर्धारित पते पर नहीं भेज सके।

ऐसे किया डाक विभाग ने वितरण

- 15 अगस्त वाले दिन तक 10 हजार 653 डाक के लिफाफे सभी डाकघरों को प्राप्त हुए।

- 2 हजार 464 डाक रक्षाबंधन वाले दिन तक निर्धारित पते पर पहुंचा दी गई। इसी 2 हजार 400 से ज्यादा डाक किसी न किसी कारण से लोगों तक नहीं पहुंची।

- 4 हजार हजार से ज्यादा डाक लिफाफे सही पता दर्ज न होने की वजह से वितरित नहीं हो सके।

कूरियर कंपनी की निगरानी फेल

इंदौर निवासी पूजा जायसवाल को उनके भाई ने जबलपुर से राखी की डाक मधुर कूरियर कंपनी से 11 अगस्त को भेजी। लेकिन रक्षाबंधन का त्योहार बीत जाने के बाद भी उन्हें डाक नहीं मिली। इसी तरह कई दूसरे लोग भी परेशान होकर कूरियर कंपनी के चक्कर काट रहे हैं।

जब उनके भाई कूरियर कंपनी के दफ्तर पहुंचे तो उन्हें दूसरे दफ्तर जाने कह दिया गया। संचालक का फोन नंबर तक डिस्पैच कार्यालय में दर्ज नहीं है। मजेदार बात यह है कि डाक विभाग के अधीन कोई कूरियर कंपनी काम नहीं करती है। इसका लाइसेंस स्थानीय स्तर पर ही जारी होता है। लेकिन मॉनिटरिंग प्रशासन द्वारा आज तक नहीं की गई। यहां तक पुलिस वेरिफिकेशन भी वेंडर्स का नहीं किया जाता।

डाक विभाग ने विशेष व्यवस्था रक्षाबंधन वाले दिन डाक पहुंचाने के लिए तैयार की थी। बहुत सी डाक ऐसी थी जिनमें सही पता दर्ज नहीं था। हालांकि अलग-अलग कारण भी डाक वितरण के दर्ज किए जाते हैं। कूरियर कंपनी विभाग के अधीन काम नहीं करती हैं। -अतुल तिवारी, एसएसपी, डाक विभाग

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