जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की चाहत रखने वाले पूर्व अतिथि विद्वानों की चार याचिकाएं खारिज कर दीं। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की युगलपीठ ने अपने आदेश में साफ किया कि याचिकाकर्ताओं ने फॉर्म भरने समय गलती की थी, इसलिए उन्हें अतिरिक्त अंक का लाभ नहीं दिया जा सकता।

याचिकाकर्ता कुंवर भरत सिंह, डॉ.अवधेश कुमार, विकास अग्रवाल व पुंडरीक शर्मा की ओर से अधिवक्ता संदीप सिंह बघेल, वेद प्रकाश नेमा व देवेंद्र प्रजापति, राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली व मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) का पक्ष अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने रखा।

क्या है नियम : मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद का विज्ञापन निकाला था, जिसमें साफ किया गया था कि जिन आवेदकों ने पूर्व में किसी विश्वविद्यालय या शासकीय महाविद्यालय के अंतर्गत अतिथि विद्वान बतौर सेवा दी है, उसे असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया में अतिरिक्त अंक का लाभ दिया जाएगा। चारों याचिकाकर्ता पूर्व में अतिथि विद्वान रह चुके हैं। लेकिन उनकी ओर से गलती यह की गई कि फॉर्म भरते समय संबंधित कॉलम में नो लिख दिया। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से यह तथ्य रेखांकित किया गया। जिसे रिकॉर्ड पर लेकर हाई कोर्ट ने याचिकाएं खारिज कर दीं। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने हाई कोर्ट को अवगत कराया कि याचिकाकर्ताओं को फॉर्म भरने के बाद फॉर्म में सुधार के लिए भी समय दिया गया था। इसके बावजूद उनकी ओर से अपनी गलती में सुधार नहीं किया गया। इससे साफ है कि यदि अतिरिक्त अंक का लाभ नहीं मिल रहा है, तो इसके लिए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग नहीं बल्कि स्वयं याचिकाकर्ता जिम्मेदार हैं।

Posted By: Brajesh Shukla

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