Jabalpur News: जबलपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण, एनजीटी ने कहा है कि यदि डेयरियां नियमों का उल्लंघन करती हैं और उनके खिलाफ शिकायतें आती हैं तो याचिकाकर्ता उनके नाम सहित सक्षम कोर्ट में मामला दायर करने स्वतंत्र हैं। एनजीटी के जस्टिस शिव कुमार सिंह व एक्सपर्ट मेंबर अरुण कुमार वर्मा की युगलपीठ में विगत दिवस इस मामले की सुनवाई हुई। राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत की। राज्य की ओर से बताया गया कि डेयिरयों शहरी क्षेत्र से शिफ्ट करने डेयरी इस्टेट बनाई जा रही है। वहीं प्रदूषण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अब तक नियमाें का उल्लंघन करने पर 122 डेयरियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डा. पीजी नाजपांडे ने एनजीटी में अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में बताया गया कि पूर्व आदेश के तहत अब भी जबलपुर में नगर निगम की सीमा से डेयरियां नहीं हटाई गई हैं। अवमानना याचिका पर एनजीटी ने एक अक्टूबर 2921 को नोटिस जारी कर सरकार और प्रदूषण बोर्ड से जवाब मांगा था। मामले पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रभात यादव ने बताया कि डेयरी इस्टेट में भूमि आवंटन की प्रक्रिया 30 मार्च, 2022 तक पूरी होनी थी, जोकि अभी भी अधूरी है। उन्होंने कहा कि पूरी योजना अभी कागजों में ही सीमित है।

प्रभारी सीएमएचओ के मामले जवाब नदारद : हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश के जरिये छतरपुर जिले के प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सीएमएचओ के तबादले पर रोक लगा दी थी। इसी के साथ राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया था। इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था।न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता मनोज कुशवाहा, कौशलेंद्र सिंह व अंशु शर्मा ने रखा। उन्होंने दलील दी कि राज्य शासन द्वारा 14 मार्च, 2022 को छतरपुर से दमोह तबादला किए जाने का आदेश जारी किया।साथ ही अपेक्षाकृत कनिष्ठ अधिकारी को प्रभार दे दिया। इस रवैये को याचिका के जरिए चुनौती दी गई।सुनवाई के बाद हाई कोर्ट से स्थगन आदेश जारी हो गया। स्थगन आदेश के प्रभावशील रहने के दौरान याचिकाकर्ता को नए सिरे से स्थानांतरित कर दिया गया। इससे दुर्भावना साफ झलक रही है। इसीलिए नए सिरे से याचिका के जरिए चुनौती दी गई है।हाई कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद तबादले पर रोक लगाते हुए जवाब-तलब कर लिया था, किंतु जवाब नदारद है।

Posted By: Shivpratap Singh

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