जबलपुर, नईदुनिया प्रतिन‍िधि। विशेष न्यायाधीश ज्योति मिश्रा की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपित गोविंद कोल की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अभियोजन की ओर से अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी पहले पीड़िता को घर बुलाया था। वहां आरोपित ने दो दिन तक बंद रखी गई पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। इससे नाबालिग सहम गई। किसी तरह चंगुल से आजाद हुई, जिसके बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। आरोपित की हरकत से साफ है कि उसे समाज में खुला छोड़ना नुकसानदेह साबित हो सकता है। वह इसी तरह अपने दूषित मनोवृत्ति का परिचय देकर नाबालिगों को अपना शिकार बना सकता है। लिहाजा, जमानत अर्जी खारिज किए जाने योग्य है। कोर्ट ने दलील से सहमत होकर अर्जी खारिज कर दी।

वन्यजीव सामग्री रखने के आरोपितों को जमानत नहीं : प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने चीतल के सींग सहित अन्य वन्यजीव सामग्री रखने के आरोपितों गौरव व रमेश की जमानत अर्जी खारिज कर दी। आरोपित के फरार होने की आशंका को गंभीरता से लेकर यह निर्णय लिया गया। अभियोजन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि मुखबिर की सूचना पर वन कर्मचारी, वन परिक्षेत्र जबलपुर, वन परिक्षेत्र पनागर, जबलपुर व एनजीओ वाइल्ड की संयुक्त टीम द्वारा आरोपितों के जबलपुर स्थित मकानों पर छापा मारा गया। इस दौरान चीतल के सींग (सपोडिड डीयर) 50 नग, इंद्रजाल तीन नग सहित अन्य सामग्री बरामद की गई। लिहाजा, अपराध दर्ज कर लिया गया। वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने का आरोप गंभीर है, अत: जमानत अर्जी खारिज किए जाने योग्य है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि बड़े तस्कर गिरोह से जुड़ाव से इन्कार नहीं किया जा सकता। आरोपित फरार भी हो सकते हैं। कोर्ट ने तर्क से सहमत होकर अर्जी खारिज कर दीं।

Posted By: Brajesh Shukla

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