जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कोविड-19 के खतरे को गंभीरता से लेते हुए नए केस फाइल करते समय हार्ड कॉपी जमा करने की अनिवार्यता का नियम शिथिल कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक के निर्देश पर रजिस्ट्रार जनरल राजेंद्र कुमार वानी ने उक्ताशय का आदेश जारी किया। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर और खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर के वकीलों को इस छूट का लाभ मिलेगा। इससे वकीलों या उनके मुंशियों को हाई कोर्ट आने की आवश्यकता नहीं रह जाएगी। वे घर बैठे अपेक्षाकृत सुविधाजनक ई-फाइलिंग कर सकेंगे। साथ ही वीडियो काॅफ्रेंसिंग के जरिये बहस करके पक्षकार के हित में कदम बढ़ा सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के कार्यकारिणी सदस्य अधिवक्ता यश सोनी ने पूर्व में इस सिलसिले में मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक को पत्र लिखा था। हाई कोर्ट ने मांग को उचित पाकर स्वीकार कर लिया। इससे पूर्व अन्य मांगें भी मानी जा चुकी हैं। वकील इससे खुश हैं। ग्रीष्म अवकाश भी सर्वाधिक खतरे वाले मई के मध्य समय मे रखा गया हैं।

विजन जबलपुर ने सुविधा दिए जाने पर दिया बल : विजन जबलपुर ने कोविड काल में केंद्रीय सेवा से सेवािनिवृत्त अधिकारियाें व कर्मचारियों को सीजीएचएस सहित अन्य सुविधाओं का लाभ दिए जाने पर बल दिया है। अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने सीजीएचएस के निदेशक को लिखे पत्र में साफ किया है कि कोविड मरीजों की मामलों को स्वीकृत करने में विलंब न किया जाए। इससे मरीज का इलाज समय पर शुरू नहीं हो पाता। लिहाजा, शिकायतों की संख्या न बढ़ने दी जाए।

Posted By: Ravindra Suhane

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