जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना आपदा को अवसर में भुनाने के मामले रोजाना सामने आ रहा है। दवाईयों से लेकर आक्‍सीजन के नाम पर मची लूट के बाद अब अंतिम संस्कार के लिए चिता की लकड़ी उपलब्ध कराने के नाम पर भी कमीशनखोरी की जा रही है। 1300 से 1500 रुपये में मिलने वाली तीन क्विंटल लकड़ी जरुरतमंदों को 2800 से 3000 रुपये तक मुहैया कराई जा रही है। यह आरोप नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस के पूर्व पार्षद दल ने लगाए हैं।

अंतिम संस्कार करने परेशानी खड़ी कर रहे : पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेश सोनकर, पूर्व पार्षद तेज कुमार भगत, संजय बघेल, गुड़डू नबी ने जारी बयान में बताया कि नगर निगम द्वारा संचालित मुक्तिधामों में अंतिम संस्कार के नाम पर गमगीन परिवारों से ज्यागदा पैसे लेकर लकड़ी उपलब्ध करवा रहा है। जो लकड़ी कुछ सामाजिक संस्थाएं गरीब परिवारों को 1300 रुपये में देतीं है वहीं मुक्तिधाम में टाल संचालित करने वाले तथाकथित लोग उतनी ही लकड़ी की कीमत 2800 रुपये से लेकर 3000 रुपये तक वसूल रहे है। मुंहमांगी रकम न देने पर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार करने परेशानी खड़ी की जा रही है।

इन मुक्तिधामों में मनमानी: आरोप है कि कोरोना के चलते शहर में मृत्युदर का ग्राफ बढ़ गया है। ज्यादातर अंत्येेष्टि चौहानी, तिलवाराघाट मुक्तिधाम में की जा रही है। जहां पीडि़तपरिवारों से चिता की लकड़ी के नाम पर लूटखसोट की जा रही है। नेता प्रतिपक्ष व पूर्व पार्षदों ने कलेक्टर से लकडि़यों की कीमत निर्धारित करने मनमानी पर रोक लगाए जाने की मांग की है।

Posted By: Brajesh Shukla

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