जबलपुर। धर्मधानी-संस्कारधानी श्रीगणेशमय हो गई है। मंगलवार को बुद्घिप्रदाता के विग्रह जगह-जगह विराजे। इस दौरान विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। अब अगले 10 दिन तक पूजा-पाठ का यही क्रम चलना है क्योंकि इस बार गणेश प्रतिमा 11 दिन तक स्थापित रहेंगी।

श्री सिद्घ गणेश मंदिर, ग्वारीघाट में सोमवार 11 दिवसीय श्री गणपति जन्म महोत्सव का आयोजन शुरू हो गया। श्रीगणेश सहस्त्रनाम अर्चन से लड्डुओं का भोग लगाया गया। श्वेत वस्त्रों के श्रृंगार से श्रीगणेश का विग्रह अत्यंत सुशोभित हो रहा था। मंगलवार 3 सितम्बर को भगवान गणेश के एकदंत स्वरूप का पीले वस्त्रों से श्रृंगार किया जाएगा।

साथ ही विभिन्न फलों से सहस्त्रार्चन होगा। सहस्त्रार्चन में अनुपमा पंडित रामानुज तिवारी, वंदना सुनील तिवारी, मनीषा रोहिताश पाठक व आशुतोष गंगल ने हिस्सा लिया। इससे पूर्व संस्थापक ब्रह्मर्षि रामबहादुर महाराज ने प्रवचनों के जरिए भक्तों का मन मोह लिया।

हाईकोर्ट बार के सिल्वर जुबली सभागार में विराजे मोदक प्रिय-हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के सिल्वर जुबली सभागार में मोदक प्रिय श्रीगणेश का विशाल विग्रह विराजमान हुआ। इस दौरान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति एसके पालो व धर्मपत्नी जस्टिस अंजुलि पालो के साथ मुख्य अतिथि रहे।

हाईकोर्ट बार अध्यक्ष रमन पटेल सहित सभी पदाधिकारियों की मौजूदगी में सचिव पंडित मनीष तिवारी ने विधि-विधान से श्रीगणेश का पूजन-अर्चन सम्पन्न किया। नवीन साज-सज्जा की शोभा-आभा से प्रदीप्त सिल्वर जुबली सभागार में गणपति पंडाल की सजावट चित्ताकर्षक है। आरती के समय अधिवक्ताओं का हुजूम रोज उमड़ेगा।

महाराष्ट्र समाज के श्रीगणेश का 121 वां वर्ष-

महाराष्ट्र समाज ने 121 वें वर्ष बुद्घिप्रदाता भगवान श्रीगणेश को विराजित किया। जबलपुर के मराठी समाज के बीच यह स्थापना वर्षभर प्रतीक्षित रहती है। आज से 121 वर्ष पूर्व लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से श्रीगणेश विराजने की परंपरा शुरू की गई थी। इसके तहत जबलपुर में दस दिवसीय आयोजन देखने लायक होता है। पंडित निलेश दाभोलकर, पंडित स्वप्निल गरे, पंडित जयेश टकलकर, पंडित मनोज तेलंग, पंडित निर्णय काले ने पूजन सम्पन्न कराया।

भागिनी महामंडल में सांस्कृतिक संध्या आज- महाराष्ट्र समाज गणेशोत्सव के अंतर्गत भागिनी महामंडल के तत्वावधान में हर्षे रंगमंच महाराष्ट्र स्कूल में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। मंगलवार को शाम 7.30 बजे से नृत्य नाटिका मोहनी-भस्मासुर वध, बचपन से उम्रदराज महिलाओं के मराठी संस्कृति से ओतप्रोत प्रहसन होंगे। तेजश्री नाजवाले, गौरी साने, सुजाता दामले व रंजना वर्तक ने उपस्थिति की अपील की है।

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Posted By: Nai Dunia News Network