जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। किसी भी मोबाइल फोन को सबसे अलग पहचान देने वाले आईएमईआई (इंटरनेशनल मोबाइल इक्यूपमेंट आईडेंटिटी यानी मोबाइल युक्ति उपस्कर पहचान संख्या) नंबर को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जोनल सायबर पुलिस टीम फर्जीवाड़े की तह तक पहुंची और चौंकाने वाला खुलासा किया, जिसकी जानकारी होने पर पुलिस के आला अधिकारी भी हैरान रह गए। दरअसल, एक ही आईएमईआई नंबर पर समूचे देश में करीब 1 लाख से ज्यादा मोबाइल सक्रिय हैं। अकेले जबलपुर में एक ही नंबर पर सक्रिय 125 मोबाइल फोन मिले हैं। करीब 50 हजार मोबाइलों की जानकारी पुलिस ने पीएचक्यू को भेजी है। शेष नंबरों को सूचीबद्धकर पूरा ब्यौरा केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने की तैयारी की जा रही है। मोबाइल की आईएमईआई से की गई छेड़छाड़ को पुलिस ने देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) विवेक शर्मा ने गुरुवार को कंट्रोल रूम में आयोजित पत्रकार वार्ता में घटनाक्रम की जानकारी दी। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक अमित सिंह, एएसपी क्राइम शिवेश सिंह बघेल मौजूद रहे।

आईजी को मिली थी गोपनीय सूचना-

बताया जाता है कि आईजी को कुछ दिन पूर्व गोपनीय सूचना दी गई थी कि जिले में कई मोबाइल कारोबारी चोरी के मोबाइलों की आईएमईआई नंबर बदलने का काम कर रहे हैं। जयंती काम्प्लेक्स ओमती स्थित सिद्धि विनायक मोबाइल शॉप में यह गोरखधंधा जोरों पर है। आईजी ने जोनल सायबर पुलिस टीम को शिकायत की जांच के निर्देश दिए। जांच के दौरान एक ऐसे मोबाइल की जानकारी टीम को मिली जिसमें कुछ दिन पहले सिद्धि विनायक मोबाइल शॉप से सुधरवाया गया था।

सभी मोबाइल वीवो कंपनी के-

मोबाइल की जांच की गई तो सुधार के बाद उसकी आईएमईआई बदली मिली। सिद्धि विनायक मोबाइल शॉप के संचालक प्रदीप ठाकुर ने उसकी आईएमईआई बदल दी थी। टीम ने जब आईएमईआई की जांच की तो देश के कौने-कौने में उसी नंबर पर संचालित 1 लाख से ज्यादा मोबाइल मिले। जबलपुर में 125 मोबाइल का पता चला जिनके यूजर्स से संपर्क कर पुलिस ने उनके मोबाइल को जांच में शामिल किया। एक ही आईएमईआई नंबर पर देश में चलने वाले सभी मोबाइल वीवो कंपनी के निकले।

नेटवर्क से बाहर किए जाएंगे सभी मोबाइल-

पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि जांच में अभी और कई मोबाइल एक ही आईएमईआई पर सक्रिय मिल सकते हैं। केंदीय गृह मंत्रालय से संपर्क कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी ताकी राष्ट्रीय स्तर पर सेंट्रल इक्यूपमेंट आईडेंटिटी रजिस्टर (सीईआईआर) में संबंधित आईएमईआई नंबर डालने के बाद सभी मोबाइल नंबरों को नेटवर्क से बाहर किया जा सके।

अन्य मोबाइल की आईएमईआई कहां बदली गई जांच शुरू-

जबलपुर में सामने आए 125 मोबाइल फोन में एक की आईएमईआई सिद्धि विनायक मोबाइल शॉप में बदली गई लेकिन अन्य मोबाइल की आईएमईआई किन कारोबारियों ने बदली थी इसका पता लगाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अभी और कारोबारी सामने आएंगे जिन्होंने डोंगल, फ्लैसर की सहायता से चोरी के अथवा खराब मोबाइलों की आईएमईआई बदलने का काम किया है।

अधिकार सिर्फ कंपनी के पास-

मोबाइलों की आईएमईआई नंबर बदलकर कारोबारियों ने केंद्र सरकार द्वारा 2017 में बनाए गए कानून का उल्लंघन किया है। कानून के मुताबिक किसी भी मोबाइल का साफ्टवेयर कंपनी के अधिकृत सेंटर में ही बदला जा सकता है। लेकिन कारोबारियों ने देश भर में एक लाख से ज्यादा मोबाइल की आईएमईआई बदल डाली जिससे धोखाधड़ी दर्ज की जा सकती है।

इनकी रही भूमिका-

मामले का पर्दाफाश करने में जोनल सायबर पुलिस टीम से एएसआई विशाल सिंह, कपूर सिंह, आरक्षक अमित, नितिन, वंदित व ओमती थाना प्रभारी एसपीएस बघेल, एसआई सतीश झारिया व क्राइम ब्रांच की भूमिका रही।

Posted By: Nai Dunia News Network