जबलपुर, नईदुनिया रिपोर्टर। सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में हैं। इस पंक्ति के जरिए अपनी देशप्रेम की भावना को जताने वाले महान क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल को इंटरनेट मीडिया पर याद किया जा रहा है। अवसर है शहीद राम प्रसाद बिस्मिल की जयंती का। जिसे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के अंतर्गत मनाया मनाया जा रहा है।

आनलाइन कक्षाओं में दी जा रही जानकारी : गौरतलब है कि कोरोना काल में जहां स्कूल-कॉलेज बंद हैं वहां विद्यार्थियों को अपने देश के महापुरुषों से अवगत कराने के लिए संस्कृति मंत्रालय द्वारा इंटरनेट मीडिया का सहारा लिया जा रहा है। संस्कृति मंत्रालय निरंतर देश के महान व्यक्तित्वों की जानकारी इंटरनेट मीडया पर साझा कर रहा है। जहां तक शहर की बात है तो शहर के सभी स्कूलों द्वारा जो आनलाइन कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं उनमें शहीद राम प्रसाद बिस्मिल से संबंधित जानकारी दी जा रही है। विद्यार्थियों को बताया जा रहा है कि राम प्रसाद बिस्मिल न सिर्फ क्रांतिकारी थे बल्कि वे बहुत ही उम्दा शायर व कवि भी थे। अपनी शायरी में उन्होंने देशप्रेम की भावनाओं को बयां किया है। इतिहासविद डॉ. आनंद सिंह राणा ने बताया कि बिस्मिल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी थे। जिन्हें 30 वर्ष की आयु में ब्रिटिश सरकार ने फांसी दे दी थी। वे काकोरी कांड की घटना में प्रमुख रूप से शामिल थे। युवा पीढ़ी के लिए बहुत आवश्यक है कि वह देश के ऐसे महान योद्धा को जानें और समझें। साथ ही युवाओं को इस बात का भी अहसास करना चाहिए कि आजादी के 75 साल होने पर देश को आगे ले जाने में उनकी क्या भूमिका है।

Posted By: Brajesh Shukla

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