जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। निजी स्कूल फीस को लेकर लगातार बना रहे दबाव के बीच सरकार ने साफ किया है कि फीस को लेरक किसी तरह की जोर जबरजस्ती न हो। विद्यार्थी को सिर्फ फीस जमा नहीं होने की दशा में आनलाइन कक्षा, परीक्षा या फिर नतीजे नहीं रोके जाए। ऐसा करने वालें स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। शासन ने हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक ही फीस वसूलने को कहा है।

विभाग ने सभी सीबीएसई, आईसीएसई, मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल एवं अन्य बोर्ड से संबद्ध गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों के लिए आदेश जारी किया हुआ है। निजी विद्यालय प्रबंधन लंबित फीस की किस्त के भुगतान न किए जाने के आधार पर किसी भी विद्यार्थी को ऑनलाइन क्लासेस या विद्यालय में भौतिक रूप से संचालित कक्षाओं में भाग लेने से नहीं रोकेंगे। इस आधार पर विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम को भी नहीं रोका जा सकेगा।

बताया जाता है प्राइमरी, मिडिल कक्षाओं से लेकर नौवीं से 12वीं में पढऩे वालों छात्रों से फीस जमा न करने पर दबाव डालकर कक्षाओं, परीक्षा से वंचित किया जा रहा था। इस संबंध में शिकायतें अभिभावकों द्वारा विभाग, शासन से की गई थी। पिछले दिनों लिटिल किंगडम स्कूल में विद्यार्थी को फीस जमा नहीं होने के कारण परीक्षा में शामिल नहीं किया गया था। इसकी जांच भी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा करवाई जा रही थी। स्कूल शिक्षा विभाग ने कहा है कि गैर अनुदान प्राप्त निजी विद्यालय प्रबंधन शैक्षणिक सत्र 2019-20 तथा 2020-21 के लिए नियत की गई फीस अभिभावकों से ले सकेंगे।

अभिभावक यह फीस 6 समान किस्तों में जमा कर सकेंगे, जो 5 मार्च 2021 से प्रारंभ होकर 5 अगस्त 2021 को समाप्त होगी। यदि किन्हीं अभिभावकों को फीस के भुगतान में कठिनाई हो रही है तो वे अपना व्यक्तिगत अभ्यावेदन संबंधित विद्यालय को प्रस्तुत कर सकेंगे। विद्यालय प्रबंधन द्वारा उक्त अभ्यावेदन को सहानुभूति पूर्वक विचार कर निराकरण किया जाएगा।

Posted By: Ravindra Suhane

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