जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर में जहां देखों वहीं काम चल रहा है। जिसमें ओवरब्रिज निर्माण से लेकर सीवर लाइन की खुदाई, सडक सुधार कार्य और केबिल लाइन टूटने के कारणों सड़कें खोद दी गई है। वहीं चौराहों पर लगे सिग्नलों को संचालित करने वाली केबिल भी इसमें टूट गई, जिससे सिग्नल बंद हो गए। जब तक उस मार्ग का निर्माण कार्य पूरा नहीं होता सिग्नल शुरू नहीं हो पाएंगे। इसमें अभी कई माह और लग सकते है, जिसके कारण यातायात की व्यवस्था ऐसी ही बनी रहेगी। जिसमें राहगीरों को रोज की परेशानी है। राहगीर उस मार्ग के स्थान में दूसरे मार्ग का चयन कर रहे है। ऐसा नहीं कि दूसरे मार्ग में खुदाई नहीं हो रही है, बल्कि वह मार्ग कम परेशानियों से भरा है। जिसके कारण वहां से वाहन ले जाना ज्यादा आसान होता है।

रानीताल, बल्देवबाग, गेट नं 1, महानद्दा, तीन पत्ती में चल रहा कार्य : शहर के मुख्य स्थान रानीताल, बल्देवबाग, गेट नं 1, महानद्दा, तीन पत्ती में ब्रिज और सीवर लाइन का काम चल रहा है। जब तक यह कार्य पूरा नहीं होता, तब तक यहां सिग्नल शुरू नहीं होंगे। वहीं कुछ जगह जो सिग्नल चल रहे है वह तकनीकी खराबी आने के कारण बंद हो रहे है और उनपर घ्यान नहीं जाता। एक दो दिन हो जाने के बाद ही यह पता चलता है कि उस मार्ग का सिग्नल बंद है, जिसके बाद उसके सुधार कार्य शुरू किया जाता है। जब तक उन सिग्नलाें को ठीक किया जाता है, तब तक दूसरे स्थान के सिग्नल खराब हो जाते है। यह क्रम सामान्य दिनों में भी चलता रहता है। लेकिन इस वक्त शहर में सिग्नल को लेकर लोग ज्यादा परेशान हो रहे है।

पीली बत्ती जलती रहती है, राहगीर खड़े रहते है : कुछ सिग्नल में जब खराबी आती है, तो उसमें पीली बत्ती जल जाती है। इसमें उस मार्ग से गुजरने वाले राहगीर सिग्नल को देखकर रुक जाते है और बत्ती लाल होने का इंतजार करते रहते है। वहीं जब बहुत देर तक बत्ती पीली ही रहती है, तो राहगीर आगे बढ़ जाते है।

जहां सिग्नल बंद है वहां आए दिन हो रहे हादसे : सिग्नल जिन चौराहों में बंद है वह शहर के सबसे व्यस्थ चौराहें है। जिसमें वाहनों का दबाव अधिक होता है। चारों ओर से वाहन तेज रफ्तार से निकलते है और इसमें जैसे ही वह बीच चौराहे पर पहुंचते है आपस में टकरा जाते है। यातायात व्यवस्था सुधरी रहे इसके लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए है।

तीन साल से खत्म ही नहीं हुआ काम : सूत्रों के मुताबिक सिग्नल लगाने वाली कंपनी का जुलाई 2018 में शहर के 20 मुख्य चौराहों पर सिग्नल लगाने और उसकी देखरेख करने का टेंडर हुआ था। जिसमें सिग्नल लगाने का कार्य दिसम्बर 2018 तक पूरा करना था और इसके बाद उन सिग्नलाें की देखरेख करनी थी। लेकिन तीन साल हो गए है अब तक सिर्फ 7 चौराहों पर ही सिग्नल लगाए गए है।

Posted By: Ravindra Suhane

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