जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। केंद्र शासन द्वारा अपने कर्मचारियों को कोरोना वायरस से उनके माता-पिता अथवा आश्रित परिवार के सदस्यों के संक्रमित होने पर उन्हें 15 दिन की स्पेशल विशेष आकस्मिक अवकाश (एससीएल) का लाभ मिलेगा। यदि कर्मचारी स्वयं कोरोना से संक्रमित होता है तो उसे क्वारंटाइन या आइसोलेशन में रहना होगा, ऐसी स्थिति में कर्मचारी को 20 दिन विशेष आकस्मिक अवकाश ले सकता है। मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने कहा कि वहीं दूसरी ओर प्रदेश में सैकड़ों अधिकारी एवं कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए उनका परिवार संक्रमित हो रहे है, लेकिन किन्तु राज्य कर्मचारियों को शासन द्वारा ऐसे किसी भी विशेष अवकाश का प्रविधान नहीं किया गया है। परिवार के सदस्य संक्रमित होने के बाद भी वह लगातार ड्यूटी कर रहे हैं। उनका परिवार संक्रमित है, लेकिन उन्हें अवकाश नहीं दिया गया। राज्य सरकार के कर्मचारियों के साथ हो रहे इस भेदभाव का संघ विरोध करता है। जब केंद्र और राज्य में एक ही सरकार है तो ऐसे में कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों। इस भेदभाव को जल्द से जल्द खत्म किया जाए।

विशेष आकस्मिक अवकाश दिया जाए : संघ के योगेन्द्र दुबे, अर्वेन्द्र राजपूत, अवधेश तिवारी, नरेन्द्र दुबे, अटल उपाध्याय, आलोक अग्निहोत्री, मुकेश सिंह, दुर्गेश पाण्डे, सुरेन्द्र जैन, गोविंद विल्थरे, दीपक राठौर, अनुराग चन्द्रा, दालचन्द पासी, राकेश सेंगर, नितिन अग्रवाल, श्यामनारायण तिवारी, नितिन शर्मा, विष्णु पाण्डे, महेश कोरी, प्रियांशु शुक्ला, विनय नामदेव, धीरेन्द्र सोनी, तारिख, संतोष तिवारी आदि ने मुख्यमंत्री को ई-मेल के माध्यम से पत्र भेजकर मांग की है केन्द्र शासन के कर्मचारियों की भांति राज्य कर्मियों को भी विशेष आकस्मिक अवकाश (स्पेशल कैजुअल लीव) का प्रविधान किया जाए।

Posted By: Brajesh Shukla

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