जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। गैस सिलेंडर फटने या लीक होने से यदि कोई हादसा होता है, तो गैस कंपनी और डीलर उसका मुआवजा देते हैं। इसके लिए सर्वे करने के लिए गैस कंपनी के सदस्य पीड़ित के घर पहुंचते हैं और वह अनुमान लगाकर नुकसान के बारे में बताते हैं। जिसके बाद उन्हें कंपनी भुगतान करती है।

कनेक्शनधारी के नाम पर ही होता है बीमा

बताया जा रहा है कि जिसके नाम से गैस कनेक्शन होता है उसी का बीमा होता है। यदि वह गैस उसके परिजन के सदस्यों के अलावा कोई दूसरा इस्तमाल करता है और हादसा होता है, तो यह बीमा मान्य नहीं होता।

मुआवजा उचित नहीं होने पर कोर्ट में होता है फैसला

गैस लीक होने पर जो नुकसान होता है ज्यादातर उसका ही मुआवजा कंपनी देती है। वह भी उस मुआवजे से यदि पीड़ित संतुष्ट है तो। वहीं गैस सिलेंडर फटने से यदि कोई मौत होती है, तो फिर मुआवजा का निर्णय कोर्ट में ही होता है। जबकि गैस कंपनी अपनी ओर से मुआवजे की राशि देने को कहती है। लेकिन मुआवजा कम होने के कारण कोर्ट की शरण लेनी पड़ती है।

लापरवाही से होती है गैस लीक और ब्लास्ट

जांच के दौरान देखा गया है कि गैस लीक और ब्लास्ट लापरवाही से होती है। इसमें रेग्यूलेटर को अच्छे से नहीं लगाने के कारण गैस निकलती रहती है। वहीं गैस जब पूरे कमरे में जमा हो जाती है, तभी यदि वहां लाइटर जला दिया जाता है, तो गैस सिलेंडर ब्लास्ट होता है। यह बहुत कम मामलों में देखा गया है। वहीं गैस सिलेंडर लीक होने का कारण भी यहीं है। रेग्यूलेटर को अच्छे से लगाएं और यदि गैस लीक होती है, तो उसे बाहर ले जाकर रख दें। वहीं गैस डीलर के नंबरों पर संपर्क करें।

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