जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। साहित्यकार के पास समाज की स्थिति मनोभाव और अतीत, वर्तमान को सार्थकता के साथ चित्रित करने का सामर्थ्य होता है। वरिष्ठ कहानीकार कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ने अपने दो कहानी संग्रह लाकडाउन व अन्य कहानियां और कोरोना नेगेटिव में वर्तमान स्थिति का कारुणिक और दिशा बोधक चित्रण किया है। कुशलेन्द्र की कहानियां कोरोना काल की त्रासदी और संघर्ष की दास्तान का सार्थक चित्रण करती हैं। इन कहानियों में व्यथा-कथा के साथ दिशा-दर्शन भी है।

यह बातें वर्तिका संस्था द्वारा आयोजित कुशलेन्द्र श्रीवास्तव के दो कहानी संग्रह का विमोचन करते हुए अतिथियों ने कहीं। समारोह की अध्‍यक्षता डॉ. हरिशंकर दुबे ने की।मुख्‍य अतिथि विवेक रंजन श्रीवास्तव और प्रमुख वक्ता राजेश पाठक प्रवीण थे। विजय नेमा अनुज व सुशील श्रीवास्तव ने कहानियों की भावभूमि के साथ कथाकार का परिचय दिया। अतिथियों ने कहा कि कोरोना ने समाज को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। इस दौरान ऐसी कई घटनाएं सामने आईं जो दिल को छू जाने वाली रहीं। कहानियों में कोरोना काल जैसे विषय का चयन लेखक की संवेदनात्मक व्यक्तिव को दर्शााता है।

अतिथि स्वागत सिद्धेश्वरी सराफ ने किया। गुरुवंदना प्रार्थना अर्गल ने और सरस्वती वंदना अर्चना गोस्‍वामी ने प्रस्तुत की। संचालन संतोष नेमा, राजेन्‍द्र मिश्रा प्रभा, विश्‍वकर्मा शील और आभार यूनुस अदीब ने किया।

द्वितीय सोपान में मनोज शुक्ल, डॉ. सलपनाथ यादव प्रेम, निशि श्रीवास्तव लखनऊ, रुचिता तुषार नीमा, मंजूषा कटलाना झाबुआ, अनीसा नेमा चेन्नई, इन्द्र बहादुर श्रीवास्तव, विनीता पैगवार विधि, सुशील जैन आभा, प्रार्थना अर्गल, मनोहर चौबे "आकाश", दीपेश दवे, आरती श्रीवास्तव, सन्तोष दुबे, कल्याण दास साहू" पोषक", डॉ. संध्या जैन श्रुति, मनोज जैन' मित्र', प्रभाविजय गावंडे, प्रमोद पवैया, अमित जैन संजय, अर्चना गोस्वामी "देवेश", अर्चना जैन, राजकुमारी रैकवार राज ने काव्य पाठ किया।

Posted By: Ravindra Suhane

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