जबलपुर, नईदुनिया रिपोर्टर। वीरांगना रानी दुर्गावती व झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान को याद करते हुए यह पूरा सप्ताह लक्ष्मी-दुर्गा बलिदान सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत विविध आयोजनों की शुरुआत हो चुकी है। साहित्यिक व सामाजिक संस्थाओं द्वारा किए जा रहे आयोजनों का उद्देश्य है कि युवाआें तक लक्ष्मी बाई व रानी दुर्गावती की वीरता की जानकारी पहुंचे। आम जनता भी इनकी वीरता को जाने और साथ ही समाज में कोशिश हो महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव लाने की।

इस कड़ी में त्रिवेणी परिषद द्वारा लक्ष्मी-दुर्गा बलिदान सप्ताह के अंतर्गत साप्ताहिक आयोजन किए जा रहे हैं। हर वर्ष तो सभी एक स्थान पर एकत्रित होकर आयोजन करते थे लेकिन इस वर्ष कोरोना को देखते हुए सभी कार्यक्रम आनलाइन किए जा रहे हैं। पहले दिन आनलाइन संगोष्ठी में मुख्य वक्ता डाॅ.इला घोष रहीं। उन्होंने दोनों वीरांगनाओं के संघर्षमय जीवन व देश के प्रति उनके समर्पण के बारे में बात की। दोनों ही राजघराने से होने के बाद भी विषम परिस्थितियों में घिरी रहीं। लेकिन उनकी जीवटता ऐसी कि कभी हार नहीं मानी। और यही हार न मानने का जज्बा उन्होंने अपने-अपने युद्ध क्षेत्र में भी दिखाया। दुश्मन भी उनकी वीरता से हैरान हो गए थे।

इस अवसर पर सुभद्रा कुमारी चौहान की रचना खूब लड़ी मर्दानी की कलाकारों ने संगीतमयी प्रस्तुति दी। चंद्रप्रकाश वैश्य, रत्ना ओझा, सुषमा श्रीवास्तव, मुकुल तिवारी, आशा श्रीवास्तव ने देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। संचालन व आभार अलका पटेल ने किया। साप्ताहिक आयोजन की श्रृंखला में दूसरे दिन आनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। जहां सभी अपनी-अपनी रचनाओं को सुनाएंगे।

Posted By: Ravindra Suhane

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