जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाईकोर्ट के निर्देश पर जितनी तेजी से कब्जों को हटाया गया है, उतनी ही तेजी से बारिश के दौरान पौधारोपण भी किया जाने लगा है। लेकिन इस बार मदन महल पहाड़ी में हुए पौधारोपण को बचाने के प्रयास भी उसी हिसाब से किए जाएंगे। पहाड़ी पर लगे पौधों को बारिश के बाद भी जीवित रखने ड्रिप इरिगेशन यानी बूंद-बूंद पानी देने वाली प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।

अभी बारिश का सीजन है, इसलिए पौधों को ज्यादा खतरा नहीं है। मौसम खुलने और तापमान बढ़ने पर रोज पानी देना जरूरी हो जाएगा। खास बात यह है कि नगर निगम प्रशासन ने पहाड़ी 25 हजार पौधों को लगाने का लक्ष्य रखा है।

बारिश समाप्त होते ही की जाएगी सिंचाई की व्यवस्था

मौके पर निगरानी के लिए तैनात वनविभाग से रिटायर अफसर श्री कांवरे ने बताया कि गढ़ा चौहानी वाले हिस्से में हुए पौधारोपण व अन्य जगहों पर बारिश का सीजन समाप्त होने तक ड्रिप इरिगेशन प्रणाली की व्यवस्था की जाएगी।

- इसके अलावा पानी की उपलब्धता बनाए रखने पहाड़ी के एक हिस्से में वाटर हार्वेस्िटग प्रणाली भी तैयार की जाने लगी है। यह प्रणाली गढ़ा चौहानी मुक्तिधाम के ठीक पास ही बनाई जा रही है। जिससे तीन तरफ की पहाड़ी से नीचे आने पर बारिश का पूरा पानी भूमिगत किया जा सके।

यह होता ड्रिप इरिगेशन

- कम पानी वाले क्षेत्रों में सिंचाई की इस प्रणाली का उपयोग किया जाता हैं। यह प्रणाली इजराइल ने इजाद की थी। जिसका उपयोग देश के विभिन्न सूखा ग्रस्त राज्यों और उन्नत खेती में भी किया जाने लगा है। इसमें पाइप लाइन को पौधों की जड़ों के करीब डाला जाता है। जिस जगह पर जड़ होती है, ठीक उसी जगह बूंद-बूंद पानी 24 घंटे में निर्धारित अवधि के लिए सप्लाई किया जाता है। इससे पानी की बचत भी हो जाती है और पौधों को जरूरत के मुताबिक पानी मिलता है। इसके माध्यम से पौधों को खाद और दवाईयां भी दी जा सकती हैं।

पहाड़ी पर लगे पौधों को सुरक्षित व जीवित रखने के लिए कई तरह के इंतजाम किए गए हैं। बारिश के बाद ड्रिप इरिगेशन प्रणाली भी लगाने का प्रस्ताव तैयार है। -केएल कांवरे, प्रोजेक्ट मैनेजर स्मार्ट सिटी, ईको टूरिज्म विभाग

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