जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना संक्रमण में पिछले डेढ़ साल से स्कूल बंद है। लाकडाउन लगने से कई परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा है। ऐसे में कई गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवार ना तो स्कूल की फीस जमा कर पा रहे हैं ना ही बच्चों को पढ़ा पा रहे हैं। कई जिलों में बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा से दूर हो गए हैं। उन बच्चों की चिंता अब स्कूल शिक्षा विभाग कर रहा है। अब ऐसे बच्चों की खोजबीन जिले में शुरू की जा रही है। जो किन्हीं कारणों से स्कूल से बाहर हैं जिसके चलते ट्रांजेशन लॉस भी बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुसार जिले में 3 से 15 वर्ष की आयु के बीच में करीब 2 लाख बच्चे हैं। जो कि प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के हैं। इसमें कितने छात्रों का स्कूलों में नामांकन दर्ज है और कितनों का नहीं है इस बात की जांच शहर से लेकर गांव तक कराई जा रही है। ताकि ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उनको वापस स्कूलों में दाखिला दिलाया जा सके।

शिक्षकों की जवाबदारी : इस कार्य के लिए शिक्षकों को जवाबदारी दी जा रही है। ग्राम वार सूची शिक्षकों को सौंपी जाएगी। हर शिक्षक को 10 से 20 बच्चों की जवाबदेही दी जाएगी। संस्था प्रमुख इसे तय करेंगे। शिक्षक बच्चों और उनके अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयास करेंगे।

बड़ी संख्या में होता है पलायन : बड़ी संख्या में ग्रामीण काम धंधे की तलाश में परिवार सहित पलायन कर जाते हैं। लाकडाउन के चलते काम धंधा ना होने के कारण कई परिवार वापस आ गए। जिसके चलते उनके बच्चों की भी पढ़ाई भी प्रभावित हो गई। ना तो उनका प्रवेश हो सका ना ही अधूरी पढ़ाई पूरी हो सकी। ऐसे बच्चों को तलाश कर फिर से स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। पंचायत के माध्यम से भी इसकी जानकारी ली जाएगी।

Posted By: Brajesh Shukla

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