जबलपुर, नईदुनिया रिपोर्टर। जबलपुर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर व नेफ्रोप्लस डायलिसिस ईकाई द्वारा रविवार को साइंटिफिक सेशन का शुभारंभ होटल कृष्णा में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मप्र मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. प्रो. आरएस शर्मा रहे। इस अवसर पर डॉ. राजेश धीरावाणी ने बताया कि जबलपुर हॉस्पिटल में डायलिसिस की सुविधा वर्ष 1991 में डॉ. दीपक बहरानी व डॉ. परिमल स्वामी के प्रयासों से शुरू हुई थी। वहीं डॉ. परिमल स्वामी ने कहा कि किडनी खराब होने का बड़ा कारण डायबिटीज भी है।

डॉ. परिमल ने कहा कि शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने व धूम्रपान के कारण किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। अतः यदि शुगर व रक्तचाप का सही तरह से इलाज कराया जाए व धूम्रपान बंद किया जाए तो काफी हद तक शुगर व उच्च रक्तचाप के मरीजों को किडनी संबंधी समस्या से छुटकारा मिल सकता है।

नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अनिल जैन ने बताया कि किडनी रोगों की प्रारंभिक जांच कराने में मरीजों को कई बार लगता है कि डायलिसिस ही एक इलाज है। जबकि यदि किसी की प्रारंभिक जांच समय पर हो जाए तो बहुत हद तक डायलिसिस की नौबत नहीं आती है। फिर भी डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती भी है तो जबलपुर हॉस्पिटल में इसकी अत्याधुनिक यूनिट है।

इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्सक चेयरपर्सन डॉ. अजय भंडारी, डॉ. वीके भारद्वाज, डॉ. अनुपम श्रीवास्तव, डॉ. अश्वनी पाठक, डॉ. नीरज जैन, डॉ. विशाल कस्तवार की भी उपस्थिति रही। डॉ. जतिन धीरावाणी ने सभी के प्रति आभार जताया।

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Posted By: Nai Dunia News Network