जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बारिश का सीजन आते ही नगर निगम को शहर में खड़े जर्जर मकान भी याद आ गए हैं। निगम प्रशासन ने अब नए सिरे से जर्जर मकानों को चिन्हित कर उन्हें तोड़ने का निर्णय लेते हुए मैदानी अमले को निर्देश जारी कर दिए हैं। निगमायुक्त संदीप जीआर ने गत दिवस बैठक कर आपदा प्रबंधन के तहत रेस्क्यू दलों को मजबूत कर उन्हें अलर्ट करने के साथ ही जर्जर भवनों को नए सिरे से चिन्हित करने और नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए सेफ्टी व सूचना बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं। ताकि आंधी, बारिश में किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना न हो सके। यह अलग बात है कि निगम प्रशासन ने दो साल पहले 94 जर्जर मकान चिन्हित किए थे। लेकिन इसमें से सिर्फ 16 मकान ही तोड़े जा सके हैं। बाकी 44 मकान अब भी लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।

जर्जर मकान गिरने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की हो चुकी है मौत: शहर में जर्जर हो चुके करीब 44 मकान अब भी खड़े हुए हैं। जो लोगों की जान के लिए खतरा साबित हो रहे हैं। नगर निगम ने पिछली बारिश के दौरान औपचारिकता निभाते हुए जर्जर मकानों को जमींदोज करने के लिए 60 से ज्यादा मकानों की सूची तो बना ली थी। लेकिन इनमें से महज 16 मकान ही तोड़ पाया है। जबकि बारिश के दिनों में एक जर्जर मकान गिरने से पिछले साल एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके नगर निगम जर्जर मकानों को नहीं गिरा पाया। है। कई मकान ऐसे हैं जहां अभी भी लोग रह रहे हैं।

किरायेदारों ने कर ली रखी है निगम से साठगांठ : लोगों की जान के लिए खतरा बने शहर में ऐसे भी मकान-दुकान हैं, जिनका कुछ हिस्सा जर्जर हो चुका है। फिर भी उसमें किरायेदार रह रहे हैं। मकान-दुकान मालिक के आवेदन पर नगर निगम का अमला मकान-दुकान तोड़ने पहुंचता है तो किरायेदार साठगांठ कर अमले को वापस लौटा देते हैं।

अब तक जर्जर मकानों से हो चुके हादसे:

- फूटाताल साठिया कुंआ में एक जर्जर मकान ढहने से उसमें रह रहे परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद भी नगर निगम ने सबक नहीं लिया है।

- गंजीपुरा मार्केट में गत दिनों प्रभा गारमेंट के पास एक पुरानी इमारत के छज्जे का एक हिस्सा अचानक भरभरा कर गिर गया था। गनीमत रही कि कोई चपेट में नहीं आया।

- नगर निगम सिर्फ नोटिस देकर जर्जर मकान खाली करने और जर्जर हिस्से की मरम्मत कराने की बात कर इतिश्री कर लेता है।

यहां अब भी खड़े जर्जर मकान : शहर में पुरानी बसाहट सराफा, फूटाताल, साठिया कुंआ, गंजीपुरा, ओमती, बेलबाग क्षेत्र में सर्वाधिक मकान जर्जर हो चुके हैं। मकान मालिक और किरायेदार उन्हें बाहर से तो मरम्मत करवा रहे लेकिन अंदरूनी स्तर पर मकान, दुकान कमजोर हो चुकी हैं। इसी तरह शीतलामाई, गढ़ा में भी जर्जर मकान खतरा बने हुए हैं।

निगम ऐसे निभा रहा औपचारिकता:

- 94 जर्जर मकान नगर निगम ने दो साल पहले किए थे चिन्हित

- 60 जर्जर मकान 2020 किए गए चिन्हित

- 16 जर्जर मकान ही अब तक ढहा पाया नगर निगम

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जर्जर मकान चिन्हित किए जा चुके हैं। कुछ प्रकरणों में किरायेदार और मकान मालिक के बीच कानूनी विवाद के चलते कार्रवाई नहीं हुई, अब नए सिरे से चिन्हित कर जर्जर मकानों को तोड़ा जाएगा।

-अजय शर्मा, अधीक्षण यंत्री, भवन शाखा नगर निगम

Posted By: Brajesh Shukla

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