जबलपुर नईदुनिया प्रतिनिधि।

मुख्य रेलवे स्टेशन से शुरू होने वाली सभी ट्रेनों के एसी कोच में यात्रियों को रेलवे ने पॉलीथिन में बेडरोल देना शुरू कर दिया है। जबलपुर रेल मंडल के मैकेनिकल विभाग ने अप्रैल से इस सुविधा को तकरीबन 14 से 15 ट्रेनों में शुरू किया गया है। रेलवे का दावा है कि जिस पॉलीथिन में यात्रियों को बेडरोल दी जा रही है वह बॉयोडिग्रेडेवल है जो खुद ब खुद नष्ट हो जाती है।

हर दिन 8 हजार पॉलीथिन पहुंचती है कोच तक

जबलपुर से हर दिन तकरीबन 14 से 16 ट्रेनें रवाना होती हैं, जिसमें तकरीबन 120 से 130 एसी कोच लगते हैं। मैकेनिकल विभाग के मुताबिक इन ट्रेनों के लिए हर दिन तकरीबन 7 से 8 हजार बेडरोल यात्रियों के लिए रखे जाते हैं। इतनी ही मात्रा में रेलवे को बायोडिग्रेडेवल पॉलीथिन की जरूरत पड़ रही है, जिसे विभाग सप्लाई भी कर रहा है। हालांकि जल्दी नष्ट या हल्की होने की वजह से यात्रियों के लिए इन पॉलीथिन का उपयोग न के बराबर है।

इको स्टेशन बनाने में मुश्किल बनेगी बेडरोल पॉलीथिन

मुख्य रेलवे स्टेशन को ईको स्टेशन बनाने के लिए सबसे पहले जबलपुर रेल मंडल ने इन स्टेशनों पर पॉलीथिन पर बैन लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन ऐसे में बेडरोल में दी जा रही ऑक्सी बायोडिग्रेडेवल प्लास्टिक बैग इस काम में अड़चन डालेगी। दरअसल यह पॉलीथिन आम पॉलीथिन की तुलना में जल्दी तो नष्ट हो जाती हैं, लेकिन इतनी जल्दी भी नहीं। यात्री बेडरोल निकलकर इन पॉलीथिन को सीट के नीचे या बायोटॉयलेट के चेम्बर में फंसा सकते हैं।

कचरा रखने के भी काम नहीं आ रही

रेलवे बोर्ड को यात्रियों द्वारा दिए गए सुझाव में यह कहा गया था कि खाकी कवर की जगह पॉलीथिन बैग दिए जाएं, ताकि सफर के दौरान निकलने वाले कचरे को उसमें रखा जा सके, लेकिन इन दिनों एसी कोच में जो बायोडिग्रेडेवल बेग दी जा रही है, उसे हाथ में लेते ही फट जाती है। उसमें कचरा रखना तो दूर, बेडरोल भी ज्यादा देर तक नहीं रखा जा सकता। इन पॉलीथिन में न तो किसी तरह की सूचना है न ही अक्सी बायोडिग्रेडेवल प्लास्टिक बैग होने का जानकारी।

वर्जन-

जबलपुर से रवाना होने वाली ट्रेनों में इन दिनों आक्सी बायोडिग्रेडेवल कैरी बेग दिए जा रहे हैं। इनकी खासियत है कि यह जल्दी नष्ट हो जाती है। इससे स्टेशन को आईएसओ बनाए रखने में मदद मिलेगी

-प्रिंयका दीक्षित, सीपीआरओ, पमरे

Posted By: Nai Dunia News Network

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