जबलपुर(jabalpur news): नगर निगम के अधिकारियों की मानवीय संवेदनाएं मर चुकी हैं बड़े शर्म की बात है कि मैंने जिस संस्था में 40 वर्ष अपनी सेवाएं दीं, उसी संस्था के द्वारा अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के स्वतत्वों के भुगतान के लिए अनावश्यक विलंब कर भटकाया जा रहा हैं। मेरे जैसे न जाने कितने निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद अपने हक की राशियां पाने के लिए नगर निगम में भटक रहे हैं'। नगर निगम के अधिकारियों की कार्यशैली को शर्मसार करती यह शिकायत मंगलवार को नगर निगम की जनसुनवाई में निगम के ही एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने दी है। नगर निगम प्रशासन के खिलाफ शिकायत के माध्यम से भड़का यह गुस्सा सिर्फ एक सेवानिवृत्त कर्मचारी का नहीं है। बल्कि इन दिनों शहर का हर नागरिक नगर निगम की कार्यशैली से परेशान है।

नगर निगम के अधिकारी आए दिन जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक और निरीक्षण कर शहर को महानगर बनाने के हवा-हवाई किले तो बना रहे हैं। लेकिन नागरिकों से जुड़े काम नहीं हो रहे हैं। लीज, नामांतरण, वेतन, पेंशन के लिए नागरिक नगर निगम पहुंच रहे पर सीट पर अधिकारी ही नहीं मिल रहे हैं। निगमायुक्त कार्यालय से अपर आयुक्त और लेकर वित्त शाखा से लेकर पेंशन शाखा तक नागरिकों की फाइलें अटक कर रह गईं हैं। जिससे नागरिकों का आक्रोश भड़क रहा है।

पहले ससम्मान मिलती थी राशि: मंगलवार को नगर निगम की जनसुनवाई में पहुंचे नगर निगम से सेवानिवृत्त कर्मचारी अजीत सिंह चौहान ने निगमायुक्त के नाम दी शिकायत में बताया कि सेवानिवृत्ति के 5 माह बाद भी जीपीएफ, पेंशन सहित अन्य स्वातत्वों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। अवकाश नगदीकरण का प्रकरण प्रशासनिक स्वीकृति एवं अंकेक्षण के बाद भुगतान के लिए चैक राइटर के पास पड़ा है। उपादाय राशि का प्रकरण पेंशन शाखा में लंबित हैं। शिकायत में कहा गया है कि लगता है नगर निगम की मानवीय संवेदनाएं मर चुकी हैं..बड़े शर्म की बात है कि मैंने जिस संस्था में 40 वर्ष अपनी सेवाएं दीं, उसी संस्था के द्वारा अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों भटकाया जा रहा है। पहले सेवानिवृत्ति पर ही सम्मान पूरी राशि का भुगतान कर दिया जाता था।

यह काम नहीं हो रहे

- नगर निगम के 35 कर्मचारियों को सेवानिवृत्त के बाद भी राशियों का भुगतान नहीं हो रहा है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के 3 लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक के भुगतान के प्रकरण लंबित हैं।

- 200 से ज्यादा कम्प्यूटर ऑपरेटर को अभी तक मानेदय का भुगतान नहीं हो पाया है। ऑपरेटरों को बिना मानदेय के ही दीपावली मनानी पड़ी। वित्त विभाग में फाइल अटकी पड़ी है।

- नक्शा पास कराने के लिए संभागीय कार्यालय से निगम मुख्यालय भेजा जा रहा है। यहां भी अधिकारी सीट पर नहीं मिल रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network