जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल,एनजीटी ने बक्सवाहा जंगल में हीरा खदान की अनुमति को लेकर जवाब तलब कर लिया है। एस्सेल कंपनी को 15 दिन में शपथपत्र पेश करने कहा है। उल्लेखनीय है कि अनुमति निरस्त करने की मांग के साथ एनजीटी में याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि पर्यावरण को हानि पहुंचाए बिना विकास और सुरक्षा उपायों की अनदेखी कर बक्सवाहा के जंगल में हीरा खदान की अनुमति दी गई है। अनुमति देने में एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी अनदेखी की गई है। इसलिए अनुमति को निरस्त किया जाना चाहिए।

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की ओर से दायर याचिका में खदान के लिए हजारों पेड़ कटने से होने वाले संभावित नुकसान घटाने और वन सलाहकार समिति का गठन करने की मांग की गई है। जितनी भूमि पर जंगल कटेगा, उससे दोगुनी भूमि में कम्पेसटरी फॉरेस्ट का निर्माण करने की भी मांग की गई है। याचिका में पर्यावरण, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में संभावित प्रभाव का मूल्यांकन करने की भी मांग की गई है। जंगल कटने से वन्य प्राणियों और पक्षियों को बचाने के लिए भी योजना तैयार करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि जंगल कटने से 382 हेक्टेयर वन भूमि में 20 गांवों के रहने वाले 8 हजार लोगों के वनाधिकार पर प्रभाव पड़ेगा। अधिवक्ता प्रभात यादव ने बहस के दौरान दलील दी कि कोविड काल में आक्सीजन की कमी हुई। लिहाजा, वृक्ष आवश्यक हैं। उनका संरक्षण होना चाहिए। इस तरह विनाश नहीं। इससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी।

Posted By: Brajesh Shukla

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