जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज अस्पताल में दीक्षांत समारोह का आयोजन किया। इस दौरान एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले 200 डाक्टरों को डिग्री प्रदान की गई।

दीक्षांत समारोह में डॉ. धर्मेश चंद्रावत को सर्वाधिक स्वर्ण पदक दिए गए। वहीं डॉ. सौदामिनी तिवारी को तीन, डॉ. वैशाली जैन को 11, डॉ. अंकिता बहरानी को एक, डॉ. अस्तुत कुरारिया को एक गोल्ड मेडल दिया गया। डॉ. अस्तुत जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रत्नेश कुरारिया के बेटे हैं।

वहीं डॉ. सौदामिनी के समारोह में नहीं पहुंच पाईं। उनके पिता मेडिकल कालेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजेश तिवारी ने बेटी के नाम का स्वर्ण पदक लिया। कार्यक्रम में डॉ. रूपलेखा चौहान, डॉ. वीके रैना, डॉ. जेपी कपूर, डॉ. बीके गुहा, डॉ. एसके वर्मा, डॉ. आरके शुक्ला, मेडिकल के डीन डॉ. प्रदीप कसार मौजूद रहे।

पैथालाजी केंदों की जांच शुरू, कमियां उजागर: शहर में संचालित ज्यादातर पैथालाजी केंद्रों में अप्रशिक्षित अमला काम कर रहा है। इसका खुलासा स्वास्थ्य विभाग की छापामारी में हुआ। गढ़ा, धनवंतरि नगर में विभाग की टीम ने कई केंद्रों का जायजा लिया। सैंपल कलेक्शन सेंटर की भी जांच की गई। जहां कलेक्शन सेंटर की आड़ में पैथालाजी केंद्र संचालित होने का पता चला। इससे पूर्व टीम ने रांझी में पैथालाजी केंद्रों की जांच की थी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रत्नेश कुरारिया ने सात दिन के भीतर पैथालाजी केंद्रों की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश िदिए हैं। बताया जाता है कि जांच के दौरान टीम के सदस्यों ने पाया कि पैथालाजी केंद्रों में डिग्री व डिप्लोमा धारक टेक्नीशियन की जगह अप्रिक्षित लोग काम कर रहे हैं। पैथालाजिस्ट के हस्ताक्षर के बगैर अथवा गलत हस्ताक्षर से रिपोर्ट जारी की जा रही है।

Posted By: Ravindra Suhane

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