अतुल शुक्ला, जबलपुर नईदुनिया। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा की बात हो या फिर ट्रेनों की रफ्तार की। पश्चिम मध्य रेलवे जोन (पमरे) ने हर क्षेत्र में झंडा फहराया है। जबलपुर के लिए पमरे एक ऐसा मील का पत्थर साबित हुआ है, जिसने शहर ही नहीं बल्कि महाकोशल को रेलवे की उन सुविधाओं से रूबरू कराया, जो पहले मेट्रो शहर तक ही सीमित हुआ करती थीं। पमरे की सीमा में लगभग 300 छोटे-बड़े रेलवे स्टेशन आते हैं तो वहीं यह जोन मध्यप्रदेश के 39 जिलों की रेल सीमा को कवर करता है। जबलपुर में जोन का मुख्यालय होने की वजह से स्टेशन से लेकर रेल सुविधाओं पर हमेशा ही जोन के मुखिया की नजर रखी है। बात ट्रेनों के संचालन, गति, सुविधा, सुरक्षा, संरक्षा जैसे पहलुओं की हो तक जबलपुर स्टेशन इन सभी में अव्वल है।

कोरोना काल में भी तोड़े रिकॉर्ड :

- जबलपुर समेत भोपाल और कोटा, तीनों मंडल में 100 फीसद विद्युतीकरण किया

- 209 किमी की नई और डबल रेल लाइन बिछाई

- 132 किमी की तीसरे लाइन बिछाई

- जबलपुर रेलवे स्टेशन को रि-डेवलपमेंट के तहत विकसित किया

- मध्यप्रदेश की पहली मेमू ट्रेन भोपाल और जबलपुर में शुरू की

- ट्रेनों की अधिकतम गति 130 किमी तक की रेलवे के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है जबलपुर

- देश की सबसे महत्वपूर्ण और पूराना रेलवे ट्रैक मुंबई-हावड़ा जबलपुर से होकर गुजरता है

- देश के बीच में होने के कारण हर राज्य के लिए आसानी से ट्रेन मिलती है

- हर जगह पहुंचने के लिए समय भी कम लगता है।

हर स्तर पर बेहतर दीं सुविधाएं :

ट्रेन: वर्तमान में जबलपुर से देश के लगभग 26 राज्यों के लिए ट्रेनों रवाना होती और गुजरती हैं। इस स्टेशन से यात्रियों के लिए उत्तर में जम्मू कटरा से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक पूर्व में सोमनाथ से लेकर पश्चिम में हावड़ा तक के लिए ट्रेनें हैं। 24 घंटे में कोरोना काल के पूर्व लगभग 105 ट्रेनें चलती और गुजरती थीं। वर्तमान में यह संख्या 50 से ज्यादा है। इनमें साधारण से सर्व सुविधा युक्त ट्रेनें शामिल हैं।

विद्युतीकरण: जबलपुर ही नहीं पमरे ने जबलपुर की सीमा में आने वाले सभी रेलवे स्टेशन तक विद्युतीकरण कर दिया है। सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना इटारसी-जबलपुर-कटनी-मानिकपुर रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण पूर्ण कर लिया गया है, जिसके बाद से इस ट्रैक पर विद्युत इंजन चलाए जा रहे हैं। मंडल की सीमा में डीजल इंजन को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इनकी जगह विद्युत इंजन ने ले ली है, जिससे यात्री ट्रेनों की रफ्तार और यात्रियों की सुरक्षा, दोनों बढ़ी है।

स्टेशन: मध्यप्रदेश का सबसे साफ और सुंदर रेलवे स्टेशन का तमगा भी जबलपुर रेलवे स्टेशन के नाम है। यहां हर प्लेटफार्म में लिफ्ट, मुख्य प्लेटफार्म पर एस्केलेटर के साथ अब रेलवे स्टेशन को रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है, जहां पार्किंग, गार्डन, फूड स्टॉल से लेकर मार्केट और रेस्टोरेंट होंगे। इतना ही नहीं स्टेशन की मुख्य बिल्डिंग को भी आधुनिक रूम देने में पमरे और जबलपुर रेल मंडल ने कोई कसर बाकी नहीं रखी।

मेमू ट्रेन: जबलपुर और भोपाल मंडल में मुंबई की लोकल ट्रेन की तर्ज पर मेमो ट्रेन शुरू कर दी गई है। अब यात्रियों को पैसेंजर ट्रेन के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पडता है। जो जबलपुर मंडल के सतना, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर और इटारसी रेलवे स्टेशन को कवर करती है। इस ट्रेन की गति पैसेंजर ट्रेन की तुलना में अधिक है, जिससे यात्री तय समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच जाता है।

यात्रियों की सुविधा :

- जबलपुर समेत अपने सभी रेलवे स्टेशन में वाय-फाय की सुविधा दी

- मंडल समेत सभी बड़े स्टेशन में पैसेंजर इफार्मेशन सिस्टम लगाया

- मदनमहल को प्रदेश का पहला पिंक स्टेशन का दर्जा दिया

- जबलपुर स्टेशन में एसी वेटिंग हॉल से लेकर नए रिटायरिंग रूम देने जा रहा है

इन प्रोजेक्ट का काम पूरा :

- इटारसी- जबलपुर-कटनी-मानिकपुर का विद्युतीकरण

- जबलपुर-गोदिंया ब्रॉडगेज लाइन का काम

- बागरावता-सोनतलाई के बीच नर्मदा में दूसरा रेल ब्रिज बनाया

- मदनमहल रेलवे स्टेशन में प्लेटफार्म और रेल लाइन बढ़ाई

- कछपुरा में रेलवे स्टेशन पर वॉशिंग पिट बनाने का रास्ता साफ हुआ

- अधारताल रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाएं बढ़ाईं

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जबलपुर रेलवे के नजरिए से सबसे महत्वपूर्ण शहर है। 1870 में जब मुंबई से हावड़ा को जोड़ा गया उसमें जबलपुर सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन था। ईस्ट इंडिया कंपनी हावड़ा से जबलपुर तक रेल लाइन लेकर आई तो वहीं मुंबई से ग्रेड इंडिया पेनिंनसुलर यानी जीआइपीआर रेल लाइन को जबलपुर तक लाई। दोनों रेल लाइन को जबलपुर में जोड़ा गया। वर्तमान में जबलपुर रेलवे स्टेशन को रिडेवलपमेंट के तहत एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है।

-राहुल जयपुरिया, जनसंपर्क अधिकारी, पश्चिम मध्य रेलवे

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