जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। रेल लाइन पर दौड़ते डीजल इंजन को हटाकर इनकी जगह विद्युत इंजन दौड़ाने के बाद रेलवे को मुनाफा होने लगा है। दरअसल पश्चिम मध्य रेल की सीमा में आने वाले जबलपुर, भोपाल और कोटा मंडल से गुजरने वाली रेलवे ट्रैक करा 100 फ़ीसदी विद्युतीकरण कर दिया गया है। वहीं ट्रैक से डीजल इंजन हटा दिए गए हैं, जिसके बाद रेलवे की डीजल पर होने वाली खपत में 80 फीसदी तक की कमी आई है। इस बार पमरे ने वित्तीय वर्ष के नौ माह में रेल जोन को 584 करोड रुपए की बचत हुई है।

इसके साथ ही भारतीय रेल के ऊर्जा संरक्षण और ग्रीन एनर्जी के लिए की गई पहल में पमरे ने अग्रणी भागीदारी की है। अन्य रेल जोनों के मुकाबले इस वित्तीय वर्ष में अभी तक ईंधन (एचएसडी ऑयल) के उपयोग में सबसे ज्यादा कमी की है। खास बात यह है कि सबसे कम हाई स्पीड डीजल ईंधन की खपत कम करते हुए पमरे ने अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया है। डीजल खर्च में कटौती के साथ प्रदूषण में कमी आई है। इससे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में और वातावरण को अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी।

पमरे में सभी रेल मार्ग पर बिजली से इंजन दौड़ रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक इंजन का उपयोग बढ़ने के साथ डीजल इंजनों की उपयोगिता कम हो गई है। इसके अलावा क्रू बिट्स और लोको लिंक को इलेक्ट्रॉनिक इंजनों का उपयोग किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त भी अन्य वैकल्पिक उपायों से डीजल इंजन की खपत को कम किया गया है। पमरे के मुताबिक अप्रैल से दिसंबर माह तक के बीच एक लाख किलोलीटर एचएसडी ऑयल(डीजल) की खपत 2019-20 में हुई, जबकि 27000 किलो लीटर एचएसडी ऑयल की खपत वर्ष 2021-22 में हुई।

पमरे में नॉन ट्रेक्शन जैसे डीजी सैट्स, एलएचबी कोच, वर्कशॉप, शेड, ट्रक मशीन, एलसी गेट और छोटे स्टेशनों पर एचएसडी ऑयल के उपयोग में कमी हुईदुकान का लाइसेंस रिन्यू करने में की देरी तो लगेगा 100 फीसदी लेट फीस 10 फरवरी तक चलेगा पटरियों की मरम्मत का काम, लेट होंगी ट्रेनें है। नॉन ट्रेक्शन के अंतर्गत वर्ष 2019-20 में अप्रैल से दिसंबर माह तक 2000 किलो लीटर एचएसडी ऑयल की खपत हुई थी। जबकि इसी अवधि में वर्ष 2021-22 में सिर्फ 800 किलो लीटर एचएसडी ऑयल का उपयोग हुआ है। यह पहले की तुलना में 1200 किलो लीटर कम है। लगभग 10 करोड़ों रुपए की बचत हुई है।

Posted By: Ravindra Suhane

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