जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की घोषणा के साथ ही जबलपुर में भी यह प्रणाली लागू करने पर बल दिया जाने लगा था। एक बार फिर नए सिरे से यह मांग बुलंद हो गई है। इस सिलसिले में मुख्यमंत्री को एक पत्र भी भेजा गया है।

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर के संयोजक मनीष शर्मा ने बताया कि आबादी के हिसाब से जबलपुर प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। लिहाजा, ला एंड आर्डर मेंटेन करने के लिए जबलपुर में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की जानी चाहिए। देश में 34 ऐसे शहर हैं, जिनकी आबादी 10 लाख से 20 लाख के मध्य है। इनमें से 26 शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की गई है। यहां तक की 10 लाख से कम आबादी वाले 31 शहरों में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू है।मनीष शर्मा ने बताया कि पुलिस कमिश्नर प्रणाली में बहुत से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने के अधिकार डीसीपी या एसीपी के पास आ जाएंगे। वर्तमान में यह अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होते हैं। वही आबकारी, आर्म्स व बिल्डिंग परमिशन की एनओसी देने के अधिकार भी पुलिस कमिश्नर के पास होंगे। धारा 144 लागू करना, लाठी चार्ज करना, मजिस्ट्रेट द्वारा दी जाने वाली जमानत आदि देना शामिल होगा।

उपभोक्ता मंच के प्रफुल्ल सक्सेना, पवन कौरव, आश्रिता पाठक, धनंजय मजूमदार, सुधीर खरे, सुनंदिनी शर्मा, सज्जाद अली, अरविंद स्थापक, अभिषेक मेहरा सहित अन्य सदस्यों ने पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी है कि हमेशा की तरह जबलपुर सहित संपूर्ण महाकोशल की अपेक्षा की जा रही है, जो कि अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जबलपुर में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव सरकार गंभीरता से ले। ऐसा न होने पर आंदोलन किया जाएगा। इस सिलसिले में आम आदमी पार्टी के साथ समन्वय बनाकर आंदोलन को गति दी जाएगी। इसकी योजना बना ली गई है। जबलपुर को अधिक दिनों तक उपेक्षा का शिकार नहीं रहने दिया जाएगा।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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