कॉलम- नगर सरकार, सुनील दाहिया

जबलपुर। कोरोना की लहर कम होते ही नगरीय चुनाव कराए जाने की अटकलें भले ही तेज हो गई हैं लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी चुनाव को लेकर फिलहाल जोखिम नहीं उठाना चाहती। जानकारों की मानें तो विधानसभा चुनाव में मुंहकी खाने के बाद पार्टी को दोबारा सत्ता में लौटने के िलए काफी जतन करने पड़े। लिहाजा नगरीय चुनाव में सीधे उतरने के बजाय सूबे के मुखिया चुनाव के पहले जनता के बीच पार्टी नेताओं का दमखम और जनता के बीच उनका वजन तुलवा रहे हैं। पहले प्रदेशाध्यक्ष और फिर प्रभारी मंत्रियों का जिला प्रवास इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। इन दो दिनों में मुखिया के सिपहसलारों ने न सिर्फ शहर में कराए जा रहे विकास कार्यों को बारीकी से देखा और समझा बल्कि संगठन की मजबूती के साथ ही पार्टी पदाधिकारियों का दमखम भी देखा। ताकि चुनाव मैदान में उतरे तो मुंहकी न खानी पड़े।

इसी बहाने बाघ के दीदार भी कर लें: आइए श्रीमान शहर में आप लोगों का स्वागत है.. काम के बहाने ही सही बारिश के सीजन में जंगल की हरी वादियों के बीच हो सकता है आपको बाघ के दीदार भी हो जाएं। दरअसल लाल बिल्डिंग के साथ ही स्मार्ट सिटी के कामों का अाकलन करने विधायकों का 11 सदस्यीय दल सोमवार को जबलपुर पहुंच रहा है। यहां कार्यों का लेखा-जोखा देखने, समझने के बाद माननीय विधायक जबलपुर के बाद मंडला के लिए प्रस्थान करेंगे। तय कार्यक्रम के तहत जिला पंचायत मंडला में बैठकों की औपचारिकता निभाई जाएगी और उसके बाद यह दल मंडला िस्थत कान्हा-किसली राष्ट्रीय उद्यान के भ्रमण पर निकलेगा। उनके सैर-सपाटे के प्रबंध संभवत: सरकारी खर्चे पर किए जाएंगे। हो सकता है कि उन्हें मैनेज करने के प्रबंध भी किए जाएं। बहरहाल काम के बहाने ही सही माननीयों को मानसूनी सीजन में बाघ के दीदार भी हो जाएंगे।

ऐसे होती है क्या नेशनल ट्रैफिक इंजीनियरिंग: शहर के चौराहों को स्मार्ट बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे कर दिए गए। कुछ चौराहों का पूरी तरह से नक्शा बदल दिया गया तो कुछ चौराहों में बेमतलब के आइलैंड खड़े कर दिए गए। लाल बिल्डिंग और स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने दावा किया था चौराहों का विकास नेशनल ट्रैफिक इंजीनियरिंग के तहत किया जा रहा है। चौराहे खूबसूरत और सुविधाजनक हो जाएंगे। लेकिन वाह री इंजीनियरिंग। बिना जांचे-परखे चौराहे पर बनाए गए लेफ्ट टर्न, आइलैंड अब राहगीरों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। यहां से गुजरने वाले पूछ रहे कि क्या ऐसी होती है नेशनल ट्रैफिक इंजीनियरिंग या यह कहकर जनता की गाढ़ी कमाई का बंदरबाट कर लिया गया। वाकई यदि बेमिसाल इंजीनियरिंग होती तो जरा सी बारिश में चौराहे तालाब में तब्दील न होते। चौराहो पर जाम न लगता, वाहन भी ऐसे न फंसते। शहर का यातायात पानी की तरह सरपट बहता।

..लो आ गया सावन, पर जरा संभलकर: ..लो अब सावन भी आ गया। तीज-त्योहारों का ये सीजन लंबा खींचने वाला है। लेकिन याद रहे अभी कोरोना संक्रमण का दौर पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। रिमझिम फुहारों के इस सीजन में कोरोना के अलावा मौसमी बीमारियां डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियों से भी बचकर रहना है। त्योहारों की मस्ती में इसे अनदेखा मत करना नहीं तो अब तक किए कराए पर पानी फिर जाएगा। क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना जता चुका है। लेकिन इससे निपटने के लिए फिलहाल शहर में कोई खास इंतजाम नहीं दिख रहे हैं । कागजों में भले ही तैयारी पूरी होने का दावा किया जा रहा पर जमीनी हकीकत इससे जुदा हैं। जो कोविड केयर सेंटर बनाए गए थे वह बंद कर दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग अफसर फिलहाल कोरोना के कम होते आंकड़े देखकर गदगद है।

Posted By: Ravindra Suhane

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