जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में हम शब्द नागरिकता बोध का प्रतीक है। हाई कोर्ट बार के वरिष्ठ उपाध्यक्ष परितोष त्रिवेदी ने यह बात कही। वे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसाेसिएशन, जबलपुर के सिल्वर जुबली सभागार में अधिवक्ता दिवस के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बार पदाधिकारी स्वयं नहीं बल्कि सभी वकीलाें के सहयोग से विजयी होता है। इसलिए हम की भावना को ग्रहण करना चाहिए। इससे एकता बनी रहती है। साथ ही अहंकार भी नहीं आता।

संविधान को लेकर रखे विचार : महाकोशल विंध्य अधिवक्ता संघ, जबलपुर के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में हाई कोर्ट बार अध्यक्ष रमन पटेल, पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे, संजय वर्मा, अवधेश कुमार तिवारी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष परितोष त्रिवेदी, उपाध्यक्ष शंभूदयाल, गुप्ता, स्टेट बार को-चेयरमैन व सचिव मनीष तिवारी, जिला बार के पूर्व अध्यक्ष सुधीर नायक, सचिव राजेश तिवारी, हरप्रीत सिंह रूपराह, ज्योति राय ने संविधान को लेकर अपने विचार रखे। उदयन तिवारी, अमित कुमार साहू, अजय दुबे, रनुका शुक्ला ने अधिवक्ताओं की एकता पर बल दिया। महाकोशल विंध्य अधिवक्ता संघ, जबलपुर के अध्यक्ष डीके शर्मा, राजेंद्र प्रताप सिंह, मंजू वर्मा, आरके दुबे, सतीश सिंह ठाकुर, सरिता कोष्टी, अमन शर्मा व संदीप दुबे ने स्वागत किया। अधिवक्ता परितोष त्रिवेदी ने संविधान की प्रस्तावना में दी गई हम की भावना को रेखांकित किया और अधिवक्ता संजय वर्मा ने इस वक्तव्य का समर्थन किया। साथ ही पूर्व महाधिवक्ता राजेंद्र तिवारी, स्व.मसूद अली व जस्टिस स्व.गुलाब गुप्ता की लायब्रेरी बार को दान किए जाने की सराहना की गई। संचालन राजेंद्र प्रताप सिंह ने आभार प्रदर्शन अमन शर्मा ने किया।

Posted By: Brajesh Shukla

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