जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शासकीय मानकुंवरबाई महिला महाविद्यालय की शोध समिति द्वारा पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जहां उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध: नई शिक्षा नीति के संदर्भ में विषय पर विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी। प्राचार्य व अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डा.लीला भलावी की मौजूदगी में कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसमें पांच दिनों तक देश और विदेश के विद्वान छात्राओं से बातचीत करेंगे।

शिक्षा ही परिवर्तन का माध्यम : उद्घाटन अवसर पर मुख्य अति​थि प्रो. संजय द्विवेदी, महानिदेशक भारतीय जनसंचार संस्थान नईदिल्ली रहे। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध: नई शिक्षा नीति के संदर्भ में कहा कि शिक्षा ही परिवर्तन का माध्यम है। यदि हमें देश को सामाजिक, आर्थिक और नैतिक रूप से समर्थ बनाना है तो शिक्षा में परिवर्तन करना है। भारत देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा और मूल्यों को स्थापित करना है। शोध और अनुसंधान को बढ़ावा देना है। नई शिक्षा नीति की सफलता शिक्षकों पर है। उसके क्रियान्वयन में समस्या न हो इस हेतु लगातार प्रयास किए गए हैं। अनुसंधान समुद्र मंथन है तभी नवनीत निकलेगा। नई शिक्षा नीति में शोध के साथ शिक्षण को महत्ता दी गई है। इनके साथ मुख्य वक्ता पूर्व पत्रकार ललित मोहन जोशी ने नई शिक्षा नीति के साथ साहित्य और सिनेमा के अंत: संबंधों पर बात की। उन्होंने भारतीय सिनेमा के मूक युग से लेकर आज तक की उन फिल्मों की बात की जो किसी न किसी साहित्यिक कृति पर आधारित है। ललित मोहन जोशी ने देवदास, गाइड, सद्गति, शतरंज के खिलाड़ी, साहब बीबी और गुलाम, आंधी जैसी फिल्मों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सिनेमा साहित्य का पुर्नसृजन है।

शिक्षा नीति में परिवर्तन सकारात्‍मक : अध्यक्ष डा.रश्मि चौबे ने कहा कि साहित्य और सिनेमा के बीच महत्वपूर्ण रिसर्च है। नई शिक्षा नीति में जो परिवर्तन लाए गए है। वे सकारात्मक हैं। नई शिक्षा नीति युवाओं के हुनर को निखारने और उनमें सकारात्मक सोच लाने में सहायक है। डा. चौबे ने डा. संजय द्विवेदी व ललित मोहन जोशी को धन्यवाद दिया। डा. जेके गुजराल ने अतिथियों के प्रति आभार दिया। संयोजक डा. स्मृति शुक्ल ने कार्यक्रम का संचालन किया। डा. उषा कैली, डा. मधुबाला शर्मा, डा. संपना चावला, डा. नूपुर निखिल देशकर, डा. सीमा डेकाटे, डा. अर्चना देवलिया, डा. ज्योति जाट का सहयोग रहा। इस कार्यशाला में देश भर से विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं।

Posted By: Brajesh Shukla

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