जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इस बार अमावस्‍या ति‍थि का योग शनिवार को बन रहा है। खास बात यह है कि अनुराधा नक्षत्र और वृश्चिक राशि पर चंद्रमा में वृश्चिक के सूर्य और केतू ग्रहों के योग के साथ ही सुकर्मा और नागकरण योग बन रहा है। इन योगों से इस बार शनि अमावस्‍या का महत्‍व बढ़ गया है। ऐसे में शनि अमावस्‍या का फल सौ गुना हो जाता है।

स्‍नान, दान पूजन का विशेष महत्‍व : पंचाग के अनुसार मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तीन दिसंबर को दोपहर 3 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर चार दिसंबर शनिवार को दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक है। ऐसे में शनि अमावस्या चार दिसंबर को मान्य है। इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। इस दिन किया गया स्नान, दान और पूजा-पाठ के कई गुना ज्यादा पुण्य मिलता है।

पूजन से प्रसन्‍न होते हैं शनि : शनि अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन पीपल का पूजन करने से सौभाग्य बढ़ता है और पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। मान्यता है कि पीपल के पेड़ में कई देवी-देवता और पितरों का वास होता है और अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। अपने पुण्यों को बढ़ाने के लिए पीपल वृक्ष के साथ-साथ उसकी परिक्रमा करना भी शुभ माना जाता है। शनिदेव की पीड़ा को शांत करने के लिए शनिवार के दिन पीपल का वृक्ष लगाने का विधान है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन पीपल का वृक्ष लगाने से शनि ग्रह के प्रभावों से शांति मिलती है। शनि अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करना बहुत लाभकारी होता है। शनि अमावस्या के दिन गरीबों में वस्त्र, उड़द दाल, काला तिल, कंबल आदि का दान करना चाहिए। भूखे लोगों को भोजन कराएं और पानी पिलाएं, ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न हो सकते हैं।

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इस बार शनि अमावस्‍या को विशेष ग्रहों का योग बन रहा है। जिसमें किया गया पूजन विशेष फलदायी होता है।

- पंडित सौरभ दुबे, ज्‍योतिषाचार्य

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Posted By: Brajesh Shukla

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