जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश का बुरा दौर चल रहा। सत्र 2019-20 के लिए प्रवेश प्रक्रिया लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन शहर के चुनिंदा कॉलेजों को छोड़ दें तो इंजीनियरिंग के दो दर्जन से अधिक कॉलेजों की सीटें आधी भी नहीं भर पाई हैं। कई कॉलेज ऐसे हैं जहां प्रवेश की संख्या दहाई के आंकड़े को भी नहीं छू पाई है। ऐसे संस्थानों को अब सत्र चलाना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि संकाय और इमारत के रखरखाव का खर्च भी निकलना भारी पड़ेगा।

निजी कॉलेजों ने कम संख्या के कारण छात्रों को दूसरे कॉलेजों में स्थानांतरण करने का मन बनाया है। सूत्रों की मानें तो इसके लिए तकनीकी शिक्षा विभाग के अफसरों से सलाह ली जा रही है। ज्ञात हो कि बीते 14 अगस्त को प्रवेश लेने की प्रक्रिया हुई। 26 अगस्त को प्रवेश ले चुके विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन का आखिरी दिन शेष है।

कॉलेजों ने छात्रों को लुभाने के लिए फीस से लेकर लैपटॉप, शैक्षणिक भ्रमण जैसे कई ऑफर दिए थे। इसके बावजूद छात्रों ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई को पसंद नहीं किया। ज्ञानगंगा इंजीनियरिंग कॉलेज के डायरेक्टर पंकज गोयल ने बताया कि कुछ कॉलेजों को छोड़कर ज्यादातर में प्रवेश की संख्या कम है। उन्होंने माना कि कॉलेजों को गुणवत्ता पर ज्यादा जोर देना होगा ताकि छात्रों का इंजीनियरिंग में दोबारा रुझान पैदा हो सके।

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