जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में धीमी रफ्तार को लेकर जिला पंचायत सीईओ ने नाराजगी जताई है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उपयंत्रियों का काम न करना सामने आया है। जिले के 30 उपयंत्रियों की खराब परफार्मेंस के कारण मनरेगा पटरी पर नहीं दौड़ रही है। इन उपयंत्रियों को योजना के तहत ज्यादा से ज्यादा मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य दिया गया था परंतु ये उपयंत्री सिर्फ 39 प्रतिशत से ज्यादा मानव दिवस सृजित नहीं कर पाए।

पीएम आवास से जिंदा है मनरेगा

जिले में मनरेगा की स्थिति ठीक नहीं है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अगर पीएम आवास के काम न हो तो योजना के प्रायः सभी काम बंद हो गए हैं। फिलहाल योजना के तहत पीएम आवासों को पूरा किया जा रहा है। 5 सालों में 51 हजार 873 पीएम आवास बनाने का काम चल रहा है जिसमें 40 हजार का काम पूरा हो गया है।

जिले में मनरेगा के 5 सालों के काम पर एक नजर

साल इतने लोगों को देना था काम इतने को मिला काम

2015-16 22 लाख 35 हजार 23 लाख 78 हजार

2016-17 20 लाख 43 हजार 15 लाख 84 हजार

2017-18 25 लाख 9 हजार 28 लाख 55 हजार

2018-19 38 लाख 42 हजार 34 लाख 57 हजार

2019-20 38 लाख 50 हजार 15 लाख 32 हजार

इतने सालों में सामग्री-मजदूरी में खर्च हुई राशि

साल मजदूरी में व्यय सामग्री में व्यय

2015-15 26 करोड़ 58 लाख 12 करोड़ 52 लाख

2016-17 29 करोड़ 91 लाख 15 करोड़ 14 लाख

2017-18 47 करोड़ 22 लाख 21 करोड़ 93 लाख

2018-19 58 करोड़ 64 लाख 24 करोड़ 46 लाख

2019-20 27 करोड़ 38 लाख 12 करोड़ 24 लाख

5 सालों से बन रहे पीएम आवास

साल टारगेट इतने बने

2016-17 10 हजार 589 10 हजार 57

2017-18 14 हजार 645 13 हजार 809

2018-19 22 हजार 47 17 हजार 505

2019-20 8 हजार 81 208 अभी तक

मनरेगा की प्रगति को लेकर लगातार काम किया जा रहा है, लोगों को ज्यादा से ज्यादा काम मिले इसके लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। कुछ ऐसे उपयंत्रियों पर नाराजगी जताई गई जो जिनका काम अच्छा नहीं है। -प्रियंक मिश्रा, सीईओ, जिला पंचायत

Posted By: Nai Dunia News Network