जबलपुर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश के जरिए राज्य में लोक अभियोजकों व अपर लोक अभियोजकों के पदों पर जिला लोक अभियोजन अधिकारियों व अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी। इसी के साथ प्रमुख सचिव विधि विधायी कार्य विभाग सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया। इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।

गुरुवार को न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता जबलपुर के अधिवक्ता आनंद कुमार शुक्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदर्शमुनि त्रिवेदी, आशीष त्रिवेदी, प्रशांत अवस्थी, असीम त्रिवेदी, सुधाकरमणि पटेल, जयंत पटेल, आशीष कुमार तिवारी व अरविन्द सिंह चौहान ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि उन्होंने दलील दी कि प्रमुख सचिव विधि व विधायी कार्य विभाग का आदेश पूरी तरह विधिविरुद्घ है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 24 (7) के अंतर्गत लोक अभियोजकों/अपर लोक अभियोजकों के पदों पर केवल 7 वर्ष से अधिक अधिवक्ता व्यवसाय के अनुभव वाले अधिवक्ताओं की नियुक्ति ही की जा सकती है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 25 के अनुसार लोक अभियोजन अधिकारियों/ अपर लोक अभियोजन अधिकारियों से इतर सहायक लोक अभियोजन अधिकारियों की नियुक्ति मजिस्ट्रेट के न्यायालयों में अभियोजन के लिए की जा सकती है। लोक अभियोजन अधिकरियों/ अपर लोक अभियोजन अधिकारियों की नियुक्ति व पदोन्नति आदि सेवा शर्तें मध्यप्रदेश पब्लिक प्रॉसीक्यूशन गजटेड सर्विस रिक्रूटमेंट रूल्स : 1991 के अधीन होती है और वे शासन से वेतन भत्ते ग्रहण करते हैं। उन्हें बार काउंसिल से अपनी सनद निलंबित कराना होती है। जबकि अधिवक्ता लोक अभियोजक के रूप में केवल रिटेनर फीस प्राप्त करता है।

Posted By:

fantasy cricket
fantasy cricket