जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकलपीठ ने क्रिकेट सट्टे में पकड़े गए एक नाबालिग की पहचान उजागर करने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, बाल विकास के लिए राष्ट्रीय आयोग, राज्य सरकार व अन्य से पूछा कि नाबालिगों की पहचान कैसे उजागर की जा रही है।

क्रिकेट सट्टे में पकड़े जाने के बाद पुलिस द्वारा नाबालिग का नाम उजागर किए जाने को लेकर जबलपुर निवासी धीरज कुमार कुकरेजा व एक नाबालिग की ओर से याचिका दायर कर कहा गया कि 1 जुलाई 2019 को क्राइम ब्रांच ने छापेमारी की कार्रवाई करते हुए क्रिकेट मैच में सट्टे की गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया। तर्क दिया गया कि इस मामले में नियत प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने तरीके से क्राइम ब्रांच और माढ़ोताल थाना जबलपुर ने विस्तार से विभिन्न दस्तावेजों में नाबालिग याचिकाकर्ता की पहचान का खुलासा किया। जबकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि ऐसे मामलों में नाबालिगों की पहचान छुपाई जाए। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार से पूछा कि इस तरह की गतिविधियां क्यों की जा रही हैं और राज्य सरकार की ओर से इन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, बाल विकास राष्ट्रीय आयोग, राज्य सरकार के महिला और बाल विकास विभाग, बाल विकास राज्य आयोग, अपराध शाखा राज्य सरकार व राज्य के पुलिस महानिरीक्षक, थाना प्रभारी माढ़ोताल जबलपुर को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह में जवाब मांगा है।

Posted By: Nai Dunia News Network