जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने वह जनहित याचिका खारिज कर दी, जिसके जरिये रेलवे की विभागीय पदोन्नति परीक्षा को चुनौती दी गई थी। जनहित याचिकाकर्ता ने कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुये परीक्षा स्थगित किये जाने पर बल दिया था।

मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार मित्तल व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान सवाल खड़ा हुआ कि जनहित याचिकाकर्ता विभागीय पदोन्नति परीक्षा से सीधे तौर पर संबंधित नहीं है। लिहाजा, जनहित याचिका जुर्माना (कॉस्ट) सहित खारिज कर दी जानी चाहिये। ऐसा इसलिये क्योंकि कोर्ट की बेशकीमती समय खराब किया गया है। जनहित याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी नंदकिशोर मित्तल के अधिवक्ता ने कोर्ट का रुख भांपते हुये जनहित याचिका वापस लेने का निवेदन किया। कोर्ट ने यह निवेदन मंजूर करते हुये जनहित याचिका खारिज कर दी। इससे पूर्व रेलवे की ओर से साफ किया गया कि विभागीय पदोन्नति परीक्षा बड़े कक्ष में आयोजित होनी है, जिसमें 10 से अधिक परीक्षार्थी नहीं बैठाये जाएंगे। कुल 330 कर्मचारी ही परीक्षा में शामिल होंगे। उसी अनुपात में कक्षों का इंतजाम किया गया है। सवाल उठता है कि जब एक भी कर्मचारी हाई कोर्ट नहीं आया, तो जनहित याचिकाकर्ता बेमानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना क्यों बना? हाई कोर्ट ने पूरा मामला समझने के बाद कोरोना के खतरे की आशंका को आधार बनाकर दायर जनहित याचिका को सारहीन पाया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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