जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि।

जिला सहित मंडला और बालाघाट के अलावा प्रदेश में घटिया चावल के मामले ने पहले तूल पकड़ा लेकिन अब सिर्फ चावल को सुधारने की कवायद हो रही है। वहीं घटिया चावल खरीदने वाले बच निकले और सिर्फ उनकी गुणवत्ता की जांच करने वालों को दोषी माना गया। वर्तमान में जिले के 4 गुणवत्ता नियंत्रकों को हटा दिया गया है। वहीं मिलर्स ने 40 फीसद चावल ही सुधारा है। जिसे वापस गोदाम भेजा जा चुका है। लेकिन ताज्जुब इस बात का है कि आला अधिकारियों पर किसी तरह की जवाबदेही तय नहीं की जा सकी।

हजारों मीट्रिक टन का खेल

- जिले में लिए गए सैंपल के बाद जांच दल ने 11 हजार मीट्रिक टन चावल को घटिया बताया था। इस मामले में मिलर्स की भूमिका भी संदिग्ध थी। इसलिए शासन के निर्देश पर 18 से ज्यादा मिल मालिकों को घटिया चावल सुधारने के लिए वापस किया जाने लगा। इस चावल में अभी तक 40 फीसद चावल ही सुधारने की जानकारी मिली है। जिन गुणवत्ता नियंत्रकों की मौजूदगी में यह कारनामा हुआ था। उन्हें ही हटाया गया है। लेकिन जो खरीदी के लिए दोषी अधिकारी या कर्मचारी थे, उनके खिलाफ अभी तक कार्रवाई देखने नहीं मिली है। जिन राशन दुकानों में घटिया चावल भेजा गया, उन दुकानों के लिए जिम्मेदार खाद्य विभाग के निरीक्षक भी बच निकले हैं। यह जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति या कर्मचारी की नहीं होती है। क्योंकि राशन दुकानों में भी सैंपल लेने का नियम है।

सुधरा चावल ही राशन में मिलेगा

- घटिया चावल की गुणवत्ता को सुधारने के बाद उसे वापस राशन दुकानों तक भेजा जाएगा। हालांकि शासन के निर्देश हैं कि चावल राशन दुकान जाने से पहले आखिरी बार उसकी जांच की जाएगी। यदि आखिरी समय में भी चावल की गुणवत्ता सही नहीं होगी तो उसे वितरित नहीं किया जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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