जनता के रखवाले-रामकृष्ण परमहंस पाण्डेय

यह घटना कोरोना से जुड़ी है। रोजाना मिलने वाले नए मरीजों व जान गंवाने वालों के सही आंकड़ों को छिपाने की सुगबुगाहट लंबे समय से हो रही थी। जिस पर एक पूर्व मंत्री ने मोहर लगा दी। सूबे के मुखिया के साथ वर्चुअल संवाद में पूर्व मंत्री ने इस पर अपना दर्द जाहिर कर दिया। जिसके बाद सबसे ज्यादा दर्द एक प्रशासनिक अधिकारी को हुआ। अपनों के बीच दर्द जाहिर करते हुए बोले कि मैं बीमार था तब भी पूर्व मंत्री को जी सर, जी सर करता रहा, परंतु उन्होंने पोल खोलकर रख दी। कर्मचारी कहने लगे कि साहब, नगर निगम वाली मैडम के आने पर चैंबर में घंटों का लाकडाउन लगाना बंद कर हकीकत का सामना करें, अन्यथा और भयावह हालात सामने आ सकते हैं। साहब, सही-सही आंकड़े दो ताकि जनता को पता चले कि वह कितने खतरे में हैं।

जबलपुर से पड़ोसी जिलों तक इंजेक्शन की कालाबाजारी: अस्पतालों में भर्ती मरीजों के स्वजन रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए गली-कूचों तक में स्थित दवा दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं। हर जगह से उन्हें निराशा मिल रही है। और तो और कुछ अस्पताल मरीजों को भर्ती करने के लिए स्वजन के समक्ष रेमडेसिविर इंजेक्शन लाने की शर्त रखने लगे हैं। रविवार को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में न्यू मुनीश मेडिकोज का कारनामा सामने आ ही चुका है। जिले में कितने इंजेक्शन आ रहे हैं, कहां बांटे जा रहे हैं। खपत का पता करने के लिए खाली वायल की गिनती कराई जाए। इधर, सरकार की नजर में जबलपुर के लोगों की कीमत ही समझ में नहीं आ रही। जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे बैठे हैं और इंजेक्शन की ज्यादातर खेप इंदौर व भोपाल पहुंच रही है। कथित व्यापारी पड़ोसी जिलों तक इंजेक्शन की कालाबाजारी कर रहे हैं। आम जनता तो बेचारी परेशान ही है।

खाकी से लेकर सफेद एप्रेन तक कोरोना की आंच: वर्दी वाले पुलिस जवान तथा एप्रेन पहनने वाले डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मचारी कोरोना की चपेट में आने लगे हैं। यही हाल रहे तो सुरक्षा व चिकित्सा व्यवस्था खतरे में पड़ सकती है। काम में लापरवाही करने वाले कुछ को छोड़ दें तो खाकी व एप्रेन पहनने वाले सुरक्षा तथा चिकित्सा में बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। जनता की मनमानी उनकी मेहनत पर पानी फेर रही है। दुकानों में ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है कि मानो स्वयं व स्वजन की जान से भी ज्यादा कीमत गृहस्थी के सामान की है। चौराहों पर तैनात जवान लापरवाहों से निपटने के लिए खुद भी संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। मरीजों की तादात बढ़ने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर लोड बढ़ गया है। असर कर्मचारियों व चिकित्सकों की सेहत पर पड़ रहा है। जनता जागरूक हो जाए तो खतरा कम हो जाए।

मासूम बेटी कोराना पॉजिटिव, खुद डटे हैं मोर्चे पर: एसडीएम आशीष पांडेय कोरोना संक्रमण के दौरान मोर्चे पर डटे हैं। कोरोना की रोकथाम, मरीजों के उपचार की व्यवस्था, रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी पर रोकथाम समेत तमाम जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। सुबह से शुरू होने वाली ड्यूटी में कब रात हो जाती है पता ही नहीं चलता। इतनी मेहनत वे तब कर रहे हैं जब उनकी चार साल की मासूम बेटी कोरोना वायरस से संक्रमित है। उनकी मनोदशा का अंदाजा लगाया जा सकता है। जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिवेश सिंह बघेल, लोकायुक्त डीएसपी दिलीप झरवड़े ओमती थाना प्रभारी एसपीएस बघेल भी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। डीसएपी झरवड़े की बेटी कोरोना की चपेट में आ गई है। ये अधिकारी नागरिकों को संक्रमण से बचाने की कोशिश में कोरोना की चपेट में आए हैं। कोरोना से बचाव की जिम्मेदारी अब नागरिकों की है।

Posted By: Ravindra Suhane

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