जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने आरक्षक भर्ती के तहत रोजगार पंजीयन जीवित नहीं होने पर भी आवेदकों को शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल करने के निर्देश सरकार और व्यावसायिक परीक्षा मंडल को दिए। मामले पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। जबलपुर निवासी गगन राज, संतोष कुमार, वर्षा शर्मा सहित कई अन्य जिले के उम्मीदवारों ने याचिका दायर कर बताया कि उनका रोजगार पंजीयन 2020 में समाप्त हो गया था। कोरोना के चलते रोजगार कार्यालय की वेबसाइट और आफिस कई महीनों तक बंद रही। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृत रूपराह ने दलील दी कि पुराने पंजीयन के आधार पर आवेदकों ने फार्म भरा। आवेदन स्वीकार हुआ और आवेदकों ने लिखित परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली।अब केवल पंजीयन समाप्ति का आधार बताकर उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने से वंचित किया जा रहा है।

भूमि का अवैध कब्ज दिलाने की शिकायत का 30 दिन में करें निराकरण :

हाई कोर्ट ने एक याचिका का इस निर्देश के साथ पटाक्षेप कर दिया कि भूमि का अवैध कब्जा दिलाने की शिकायत का 30 दिन के भीतर निराकरण किया जाए। सही नहीं पुलिस अधीक्षक रीवा द्वारा याचिकाकर्ता को सुरक्षा भी प्रदान की जाए। यदि सुरक्षा न दी जा सके तो 15 दिन के भीतर इसका कारण बताया जाए। प्रशासनिक न्यायमूर्ति शील नागू की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता रीवा निवासी मोहम्मद शहीद अंसारी की ओर से अधिवक्ता शीतला प्रसाद त्रिपाठी व सुशील त्रिपाठी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि तहसीलदार रीवा रामेश्वर त्रिपाठी सहित राजस्व कर्मचारियों से मिलीभगत करके याचिकाकर्ता की भूमि पर अवैध रूप से सुनील सिंह को काबिज करा दिया। इस सिलसिले में कलेक्टर से शिकायत के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई, इसीलिए हाई कोर्ट आना पड़ा।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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